1 शमूएल २९:४
तब पलिश्ती हाकिम उससे क्रोधित हुए; और उससे कहा, “उस पुरुष को लौटा दे, कि वह उस स्थान पर जाए जो तूने उसके लिये ठहराया है; वह हमारे संग लड़ाई में न आने पाएगा, कहीं ऐसा न हो कि वह लड़ाई में हमारा विरोधी बन जाए। फिर वह अपने स्वामी से किस रीति से मेल करे? क्या लोगों के सिर कटवाकर न करेगा?1 शमूएल २९:४ · IRV
यह पद अन्य भाषाओं में
- English — 1 Samuel 29:4
- But the princes of the Philistines were angry with him; and the princes of the Philistines said to him, “Make the man return, that he may go back to his place where you have appointed him, and let him not go down with us to battle, lest in the battle he become an adversary to us. For with what should this fellow reconcile himself to his lord? Should it not be with the heads of these men?
- ગુજરાતી — 1 શમુએલ ૨૯:૪
- પણ પલિસ્તીઓના સરદારો તેના પર ગુસ્સે થયા; તેઓએ તેને કહ્યું, “આ માણસને પાછો મોકલ, જે જગ્યા તેં તેને ઠરાવી આપી છે ત્યાં તે પાછો જાય; તેને આપણી સાથે લડાઈમાં આવવા ન દેતો, રખેને યુદ્ધમાં તે આપણો શત્રુ થાય. કેમ કે તે પોતાના માલિક સાથે સલાહ શાંતિ કરી દે તો? શું તે આપણા માણસોના માથાં નહિ આપે?
संदर्भ में
२तब पलिश्तियों के सरदार अपने-अपने सैंकड़ों और हजारों समेत आगे बढ़ गए, और सेना के पीछे-पीछे आकीश के साथ दाऊद भी अपने जनों समेत बढ़ गया।
३तब पलिश्ती हाकिमों ने पूछा, “इन इब्रियों का यहाँ क्या काम है?” आकीश ने पलिश्ती सरदारों से कहा, “क्या वह इस्राएल के राजा शाऊल का कर्मचारी दाऊद नहीं है, जो क्या जाने कितने दिनों से वरन् वर्षों से मेरे साथ रहता है, और जब से वह भाग आया, तब से आज तक मैंने उसमें कोई दोष नहीं पाया।”
४तब पलिश्ती हाकिम उससे क्रोधित हुए; और उससे कहा, “उस पुरुष को लौटा दे, कि वह उस स्थान पर जाए जो तूने उसके लिये ठहराया है; वह हमारे संग लड़ाई में न आने पाएगा, कहीं ऐसा न हो कि वह लड़ाई में हमारा विरोधी बन जाए। फिर वह अपने स्वामी से किस रीति से मेल करे? क्या लोगों के सिर कटवाकर न करेगा?
५क्या यह वही दाऊद नहीं है, जिसके विषय में लोग नाचते और गाते हुए एक दूसरे से कहते थे, ‘शाऊल ने हजारों को, पर दाऊद ने लाखों को मारा है?’”
६तब आकीश ने दाऊद को बुलाकर उससे कहा, “यहोवा के जीवन की शपथ तू तो सीधा है, और सेना में तेरा मेरे संग आना-जाना भी मुझे भावता है; क्योंकि जब से तू मेरे पास आया तब से लेकर आज तक मैंने तो तुझ में कोई बुराई नहीं पाई। तो भी सरदार लोग तुझे नहीं चाहते।
