2 इतिहास ६:३२
“फिर परदेशी भी जो तेरी प्रजा इस्राएल का न हो, जब वह तेरे बड़े नाम और बलवन्त हाथ और बढ़ाई हुई भुजा के कारण दूर देश से आए, और आकर इस भवन की ओर मुँह किए हुए प्रार्थना करे,2 इतिहास ६:३२ · IRV
यह पद अन्य भाषाओं में
- English — 2 Chronicles 6:32
- “Moreover, concerning the foreigner, who is not of your people Israel, when he comes from a far country for your great name’s sake and your mighty hand and your outstretched arm, when they come and pray toward this house,
- ગુજરાતી — 2 કાળવૃતાંત ૬:૩૨
- આ ઉપરાંત, વિદેશીઓ કે જેઓ તમારા ઇઝરાયલી લોકોમાંના નથી તેઓ સંબંધી: જ્યારે તેઓ તમારા મહાન નામને કારણે, તમારા પરાક્રમી હાથ તથા તમારા લંબાવેલા ભુજની ખાતર દૂર દેશથી આવે; જયારે તેઓ આવીને આ સભાસ્થાન તરફ ફરીને પ્રાર્થના કરે,
संदर्भ में
३०तो तू अपने स्वर्गीय निवास-स्थान से सुनकर क्षमा करना, और एक-एक के मन की जानकर उसकी चाल के अनुसार उसे फल देना; (तू ही तो आदमियों के मन का जाननेवाला है);
३१कि वे जितने दिन इस देश में रहें, जिसे तूने उनके पुरखाओं को दिया था, उतने दिन तक तेरा भय मानते हुए तेरे मार्गों पर चलते रहें।
३२“फिर परदेशी भी जो तेरी प्रजा इस्राएल का न हो, जब वह तेरे बड़े नाम और बलवन्त हाथ और बढ़ाई हुई भुजा के कारण दूर देश से आए, और आकर इस भवन की ओर मुँह किए हुए प्रार्थना करे,
३३तब तू अपने स्वर्गीय निवास-स्थान में से सुने, और जिस बात के लिये ऐसा परदेशी तुझे पुकारे, उसके अनुसार करना; जिससे पृथ्वी के सब देशों के लोग तेरा नाम जानकर, तेरी प्रजा इस्राएल के समान तेरा भय मानें; और निश्चय करें, कि यह भवन जो मैंने बनाया है, वह तेरा ही कहलाता है।
३४“जब तेरी प्रजा के लोग जहाँ कहीं तू उन्हें भेजे वहाँ अपने शत्रुओं से लड़ाई करने को निकल जाएँ, और इस नगर की ओर जिसे तूने चुना है, और इस भवन की ओर जिसे मैंने तेरे नाम का बनाया है, मुँह किए हुए तुझ से प्रार्थना करें,
