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Methodist Church Nadiad

2 थिस्सलुनीकियों २:४

जो विरोध करता है, और हर एक से जो परमेश्वर, या पूज्य कहलाता है, अपने आपको बड़ा ठहराता है, यहाँ तक कि वह परमेश्वर के मन्दिर में बैठकर अपने आपको परमेश्वर प्रगट करता है। (यहे. 28:2, दानि. 11:36,37)

2 थिस्सलुनीकियों २:४ · IRV

यह पद अन्य भाषाओं में

English2 Thessalonians 2:4
He opposes and exalts himself against all that is called God or that is worshiped, so that he sits as God in the temple of God, setting himself up as God.
ગુજરાતીથેસ્સાલોનિકીઓને બીજો પત્ર ૨:૪
જે ઈશ્વર અને આરાધ્ય ગણાય છે તે સઘળાંનો વિરોધ કરી પોતાને મોટો મનાવનાર આ છે કે જેથી તે ઈશ્વરના ભક્તિસ્થાનમાં ઈશ્વર તરીકે બેસે અને સ્વને ઈશ્વર તરીકે રજૂ કરે.

संदर्भ में

कि किसी आत्मा, या वचन, या पत्री के द्वारा जो कि मानो हमारी ओर से हो, यह समझकर कि प्रभु का दिन आ पहुँचा है, तुम्हारा मन अचानक अस्थिर न हो जाए; और न तुम घबराओ।

किसी रीति से किसी के धोखे में न आना क्योंकि वह दिन न आएगा, जब तक विद्रोह नहीं होता, और वह अधर्मी पुरुष अर्थात् विनाश का पुत्र प्रगट न हो।

जो विरोध करता है, और हर एक से जो परमेश्वर, या पूज्य कहलाता है, अपने आपको बड़ा ठहराता है, यहाँ तक कि वह परमेश्वर के मन्दिर में बैठकर अपने आपको परमेश्वर प्रगट करता है। (यहे. 28:2, दानि. 11:36,37)

क्या तुम्हें स्मरण नहीं, कि जब मैं तुम्हारे यहाँ था, तो तुम से ये बातें कहा करता था?

और अब तुम उस वस्तु को जानते हो, जो उसे रोक रही है, कि वह अपने ही समय में प्रगट हो।

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