प्रेरितों के काम २८:२७
क्योंकि इन लोगों का मन मोटा, और उनके कान भारी हो गए हैं, और उन्होंने अपनी आँखें बन्द की हैं, ऐसा न हो कि वे कभी आँखों से देखें, और कानों से सुनें, और मन से समझें और फिरें, और मैं उन्हें चंगा करूँ।’ (यशा. 6:9,10)प्रेरितों के काम २८:२७ · IRV
यह पद अन्य भाषाओं में
- English — Acts 28:27
- For this people’s heart has grown callous. Their ears are dull of hearing. Their eyes they have closed. Lest they should see with their eyes, hear with their ears, understand with their heart, and would turn again, then I would heal them.’
- ગુજરાતી — પ્રેરિતોનાં કૃત્યો ૨૮:૨૭
- કેમ કે એ લોકોનાં મન જડ થઈ ગયાં છે, તેઓના કાન બહેર મારી ગયા છે, તેઓએ પોતાની આંખો બંધ કરેલી છે, કદાપિ તેઓને આંખે દેખાય, તેઓ કાને સાંભળે, મનથી સમજે અને ફરે અને હું તેઓને સાજા કરું.
संदर्भ में
२५जब वे आपस में एकमत न हुए, तो पौलुस के इस एक बात के कहने पर चले गए, “पवित्र आत्मा ने यशायाह भविष्यद्वक्ता के द्वारा तुम्हारे पूर्वजों से ठीक ही कहा,
२६‘जाकर इन लोगों से कह, कि सुनते तो रहोगे, परन्तु न समझोगे, और देखते तो रहोगे, परन्तु न बूझोगे;
२७क्योंकि इन लोगों का मन मोटा, और उनके कान भारी हो गए हैं, और उन्होंने अपनी आँखें बन्द की हैं, ऐसा न हो कि वे कभी आँखों से देखें, और कानों से सुनें, और मन से समझें और फिरें, और मैं उन्हें चंगा करूँ।’ (यशा. 6:9,10)
२८“अतः तुम जानो, कि परमेश्वर के इस उद्धार की कथा अन्यजातियों के पास भेजी गई है, और वे सुनेंगे।” (भज. 67:2, भज. 98:3, यशा. 40:5)
२९जब उसने यह कहा तो यहूदी आपस में बहुत विवाद करने लगे और वहाँ से चले गए।
