दानिय्येल ४:२३
और हे राजा, तूने जो एक पवित्र दूत को स्वर्ग से उतरते और यह कहते देखा कि वृक्ष को काट डालो और उसका नाश करो, तो भी उसके ठूँठे को जड़ समेत भूमि में छोड़ो, और उसको लोहे और पीतल के बन्धन से बाँधकर मैदान की हरी घास के बीच में रहने दो; वह आकाश की ओस से भीगा करे, और उसको मैदान के पशुओं के संग ही भाग मिले; और जब तक सात युग उस पर बीत न चुकें, तब तक उसकी ऐसी ही दशा रहे।दानिय्येल ४:२३ · IRV
यह पद अन्य भाषाओं में
- English — Daniel 4:23
- “Whereas the king saw a holy watcher coming down from the sky and saying, ‘Cut down the tree, and destroy it; nevertheless leave the stump of its roots in the earth, even with a band of iron and bronze, in the tender grass of the field, and let it be wet with the dew of the sky. Let his portion be with the animals of the field, until seven times pass over him.’
- ગુજરાતી — દાનિયેલ ૪:૨૩
- હે રાજા, તમે પવિત્ર દૂતને આકાશમાંથી નીચે ઊતરતો જોયો અને કહેતો હતો કે, ‘આ વૃક્ષને કાપીને તેનો નાશ કરો, પણ તેના મૂળની જડને લોખંડ તથા પિત્તળથી બાંધીને ખેતરના કુમળા ઘાસમાં રહેવા દો. સાત વર્ષ પસાર થાય ત્યાં સુધી તેને આકાશમાંથી પડતા ઝાકળથી પલળવા દો. તેને ખેતરના જંગલી પશુઓ સાથે રહેવા દો.’”
संदर्भ में
२१जिसके पत्ते सुन्दर और फल बहुत थे, और जिसमें सभी के लिये भोजन था; जिसके नीचे मैदान के सब पशु रहते थे, और जिसकी डालियों में आकाश की चिड़ियाँ बसेरा करती थीं,
२२हे राजा, वह तू ही है। तू महान और सामर्थी हो गया, तेरी महिमा बढ़ी और स्वर्ग तक पहुँच गई, और तेरी प्रभुता पृथ्वी की छोर तक फैली है।
२३और हे राजा, तूने जो एक पवित्र दूत को स्वर्ग से उतरते और यह कहते देखा कि वृक्ष को काट डालो और उसका नाश करो, तो भी उसके ठूँठे को जड़ समेत भूमि में छोड़ो, और उसको लोहे और पीतल के बन्धन से बाँधकर मैदान की हरी घास के बीच में रहने दो; वह आकाश की ओस से भीगा करे, और उसको मैदान के पशुओं के संग ही भाग मिले; और जब तक सात युग उस पर बीत न चुकें, तब तक उसकी ऐसी ही दशा रहे।
२४हे राजा, इसका अर्थ जो परमप्रधान ने ठाना है कि राजा पर घटे, वह यह है,
२५तू मनुष्यों के बीच से निकाला जाएगा , और मैदान के पशुओं के संग रहेगा; तू बैलों के समान घास चरेगा; और आकाश की ओस से भीगा करेगा और सात युग तुझ पर बीतेंगे, जब तक कि तू न जान ले कि मनुष्यों के राज्य में परमप्रधान ही प्रभुता करता है, और जिसे चाहे वह उसे दे देता है।
