दानिय्येल ६:१२
तब वे राजा के पास जाकर, उसकी राजआज्ञा के विषय में उससे कहने लगे, “हे राजा, क्या तूने ऐसे आज्ञापत्र पर हस्ताक्षर नहीं किया कि तीस दिन तक जो कोई तुझे छोड़ किसी मनुष्य या देवता से विनती करेगा, वह सिंहों की माँद में डाल दिया जाएगा?” राजा ने उत्तर दिया, “हाँ, मादियों और फारसियों की अटल व्यवस्था के अनुसार यह बात स्थिर है।”दानिय्येल ६:१२ · IRV
यह पद अन्य भाषाओं में
- English — Daniel 6:12
- Then they came near, and spoke before the king concerning the king’s decree: “Haven’t you signed a decree that every man who makes a petition to any god or man within thirty days, except to you, O king, shall be cast into the den of lions?” The king answered, “This thing is true, according to the law of the Medes and Persians, which doesn’t alter.”
- ગુજરાતી — દાનિયેલ ૬:૧૨
- તેથી તેઓએ રાજા પાસે જઈને તેના હુકમ વિષે કહ્યું, “હે રાજા, શું તમે એવો હુકમ ફરમાવ્યો ન હતો કે જે કોઈ ત્રીસ દિવસ સુધી આપના સિવાય બીજા કોઈપણ દેવ કે, માણસને અરજ કરશે તેને સિંહોના બિલમાં નાખવામાં આવશે?” રાજાએ જવાબ આપ્યો, “આ વાત સાચી છે, માદીઓ તથા ઇરાનીઓનો કાયદા પ્રમાણે તે છે; જે કદી રદ થતા નથી.”
संदर्भ में
१०जब दानिय्येल को मालूम हुआ कि उस पत्र पर हस्ताक्षर किया गया है, तब वह अपने घर में गया जिसकी ऊपरी कोठरी की खिड़कियाँ यरूशलेम की ओर खुली रहती थीं, और अपनी रीति के अनुसार जैसा वह दिन में तीन बार अपने परमेश्वर के सामने घुटने टेककर प्रार्थना और धन्यवाद करता था, वैसा ही तब भी करता रहा।
११तब उन पुरुषों ने उतावली से आकर दानिय्येल को अपने परमेश्वर के सामने विनती करते और गिड़गिड़ाते हुए पाया।
१२तब वे राजा के पास जाकर, उसकी राजआज्ञा के विषय में उससे कहने लगे, “हे राजा, क्या तूने ऐसे आज्ञापत्र पर हस्ताक्षर नहीं किया कि तीस दिन तक जो कोई तुझे छोड़ किसी मनुष्य या देवता से विनती करेगा, वह सिंहों की माँद में डाल दिया जाएगा?” राजा ने उत्तर दिया, “हाँ, मादियों और फारसियों की अटल व्यवस्था के अनुसार यह बात स्थिर है।”
१३तब उन्होंने राजा से कहा, “यहूदी बंधुओं में से जो दानिय्येल है, उसने, हे राजा, न तो तेरी ओर कुछ ध्यान दिया, और न तेरे हस्ताक्षर किए हुए आज्ञापत्र की ओर; वह दिन में तीन बार विनती किया करता है।”
१४यह वचन सुनकर, राजा बहुत उदास हुआ, और दानिय्येल को बचाने के उपाय सोचने लगा; और सूर्य के अस्त होने तक उसके बचाने का यत्न करता रहा।
