सभोपदेशक १:२
उपदेशक का यह वचन है, “व्यर्थ ही व्यर्थ, व्यर्थ ही व्यर्थ! सब कुछ व्यर्थ है।”सभोपदेशक १:२ · IRV
यह पद अन्य भाषाओं में
- English — Ecclesiastes 1:2
- “Vanity of vanities,” says the Preacher; “Vanity of vanities, all is vanity.”
- ગુજરાતી — સભાશિક્ષક ૧:૨
- સભાશિક્ષક કહે છે કે. “વ્યર્થતાની વ્યર્થતા, વ્યર્થતાની વ્યર્થતા સઘળું વ્યર્થ છે. સઘળું પવનને મૂઠ્ઠીમાં ભરવા જેવું છે.
संदर्भ में
१यरूशलेम के राजा, दाऊद के पुत्र और उपदेशक के वचन।
२उपदेशक का यह वचन है, “व्यर्थ ही व्यर्थ, व्यर्थ ही व्यर्थ! सब कुछ व्यर्थ है।”
३उस सब परिश्रम से जिसे मनुष्य सूर्य के नीचे करता है, उसको क्या लाभ प्राप्त होता है?
४एक पीढ़ी जाती है, और दूसरी पीढ़ी आती है, परन्तु पृथ्वी सर्वदा बनी रहती है।
