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Methodist Church Nadiad
इसलिए मैंने अपने जीवन से घृणा की, क्योंकि जो काम सूर्य के नीचे किया जाता है मुझे बुरा मालूम हुआ; क्योंकि सब कुछ व्यर्थ और वायु को पकड़ना है।

सभोपदेशक २:१७ · IRV

यह पद अन्य भाषाओं में

EnglishEcclesiastes 2:17
So I hated life, because the work that is worked under the sun was grievous to me; for all is vanity and a chasing after wind.
ગુજરાતીસભાશિક્ષક ૨:૧૭
તેથી મને જિંદગી પર ધિક્કાર ઊપજ્યો કેમ કે પૃથ્વી પર જે કામ કરવામાં આવે છે તે મને દુઃખદાયક લાગ્યું. માટે સઘળું વ્યર્થ તથા પવનને મૂઠ્ઠીમાં ભરવા જેવું છે.

संदर्भ में

१५तब मैंने मन में कहा, “जैसी मूर्ख की दशा होगी, वैसी ही मेरी भी होगी; फिर मैं क्यों अधिक बुद्धिमान हुआ?” और मैंने मन में कहा, यह भी व्यर्थ ही है।

१६क्योंकि न तो बुद्धिमान का और न मूर्ख का स्मरण सर्वदा बना रहेगा, परन्तु भविष्य में सब कुछ भूला दिया जाएगा । बुद्धिमान कैसे मूर्ख के समान मरता है!

१७इसलिए मैंने अपने जीवन से घृणा की, क्योंकि जो काम सूर्य के नीचे किया जाता है मुझे बुरा मालूम हुआ; क्योंकि सब कुछ व्यर्थ और वायु को पकड़ना है।

१८मैंने अपने सारे परिश्रम के प्रतिफल से जिसे मैंने सूर्य के नीचे किया था घृणा की, क्योंकि अवश्य है कि मैं उसका फल उस मनुष्य के लिये छोड़ जाऊँ जो मेरे बाद आएगा।

१९यह कौन जानता है कि वह मनुष्य बुद्धिमान होगा या मूर्ख? तो भी सूर्य के नीचे जितना परिश्रम मैंने किया, और उसके लिये बुद्धि प्रयोग की उस सब का वही अधिकारी होगा। यह भी व्यर्थ ही है।

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