सभोपदेशक २:३
मैंने मन में सोचा कि किस प्रकार से मेरी बुद्धि बनी रहे और मैं अपने प्राण को दाखमधु पीने से किस प्रकार बहलाऊँ और कैसे मूर्खता को थामे रहूँ, जब तक मालूम न करूँ कि वह अच्छा काम कौन सा है जिसे मनुष्य अपने जीवन भर करता रहे।सभोपदेशक २:३ · IRV
यह पद अन्य भाषाओं में
- English — Ecclesiastes 2:3
- I searched in my heart how to cheer my flesh with wine, my heart yet guiding me with wisdom, and how to lay hold of folly, until I might see what it was good for the sons of men that they should do under heaven all the days of their lives.
- ગુજરાતી — સભાશિક્ષક ૨:૩
- પછી મેં મારા અંત:કરણમાં શોધ કરી કે હું મારા શરીરને દ્રાક્ષારસથી મગ્ન કરું, તેમ છતાં મારા અંત:કરણનું ડહાપણ તેવું ને તેવું જ રહે છે. વળી માણસોએ પૃથ્વી ઉપર પોતાના પૂરા આયુષ્યપર્યંત શું કરવું સારું છે તે મને સમજાય ત્યાં સુધી હું મૂર્ખાઈ ગ્રહણ કરું.
संदर्भ में
१मैंने अपने मन से कहा, “चल, मैं तुझको आनन्द के द्वारा जाँचूँगा; इसलिए आनन्दित और मगन हो।” परन्तु देखो, यह भी व्यर्थ है।
२मैंने हँसी के विषय में कहा, “यह तो बावलापन है,” और आनन्द के विषय में, “उससे क्या प्राप्त होता है?”
३मैंने मन में सोचा कि किस प्रकार से मेरी बुद्धि बनी रहे और मैं अपने प्राण को दाखमधु पीने से किस प्रकार बहलाऊँ और कैसे मूर्खता को थामे रहूँ, जब तक मालूम न करूँ कि वह अच्छा काम कौन सा है जिसे मनुष्य अपने जीवन भर करता रहे।
४मैंने बड़े-बड़े काम किए; मैंने अपने लिये घर बनवा लिए और अपने लिये दाख की बारियाँ लगवाईं;
५मैंने अपने लिये बारियाँ और बाग लगवा लिए, और उनमें भाँति-भाँति के फलदाई वृक्ष लगाए।
