सभोपदेशक ८:१५
तब मैंने आनन्द को सराहा, क्योंकि सूर्य के नीचे मनुष्य के लिये खाने-पीने और आनन्द करने को छोड़ और कुछ भी अच्छा नहीं, क्योंकि यही उसके जीवन भर जो परमेश्वर उसके लिये सूर्य के नीचे ठहराए, उसके परिश्रम में उसके संग बना रहेगा।सभोपदेशक ८:१५ · IRV
यह पद अन्य भाषाओं में
- English — Ecclesiastes 8:15
- Then I commended mirth, because a man has no better thing under the sun than to eat, to drink, and to be joyful: for that will accompany him in his labor all the days of his life which God has given him under the sun.
- ગુજરાતી — સભાશિક્ષક ૮:૧૫
- તેથી મેં તેઓને આનંદ કરવાની ભલામણ કરી, કેમ કે ખાવું-પીવું તથા મોજમઝા કરવી તેના કરતાં માણસને માટે દુનિયા પર કશું શ્રેષ્ઠ નથી; કેમ કે ઈશ્વરે તેને પૃથ્વી ઉપર જે આયુષ્ય આપ્યું છે તેનાં બધા દિવસોની મહેનતનાં ફળમાંથી તેને એટલું જ મળશે.
संदर्भ में
१३परन्तु दुष्ट का भला नहीं होने का, और न उसकी जीवनरूपी छाया लम्बी होने पाएगी, क्योंकि वह परमेश्वर का भय नहीं मानता।
१४एक व्यर्थ बात पृथ्वी पर होती है , अर्थात् ऐसे धर्मी हैं जिनकी वह दशा होती है जो दुष्टों की होनी चाहिये, और ऐसे दुष्ट हैं जिनकी वह दशा होती है जो धर्मियों की होनी चाहिये। मैंने कहा कि यह भी व्यर्थ ही है।
१५तब मैंने आनन्द को सराहा, क्योंकि सूर्य के नीचे मनुष्य के लिये खाने-पीने और आनन्द करने को छोड़ और कुछ भी अच्छा नहीं, क्योंकि यही उसके जीवन भर जो परमेश्वर उसके लिये सूर्य के नीचे ठहराए, उसके परिश्रम में उसके संग बना रहेगा।
१६जब मैंने बुद्धि प्राप्त करने और सब काम देखने के लिये जो पृथ्वी पर किए जाते हैं अपना मन लगाया, कि कैसे मनुष्य रात-दिन जागते रहते हैं;
१७तब मैंने परमेश्वर का सारा काम देखा जो सूर्य के नीचे किया जाता है, उसकी थाह मनुष्य नहीं पा सकता। चाहे मनुष्य उसकी खोज में कितना भी परिश्रम करे, तो भी उसको न जान पाएगा; और यद्यपि बुद्धिमान कहे भी कि मैं उसे समझूँगा, तो भी वह उसे न पा सकेगा।
