एस्तेर ८:९
उसी समय अर्थात् सीवान नामक तीसरे महीने के तेईसवें दिन को राजा के लेखक बुलवाए गए और जिस-जिस बात की आज्ञा मोर्दकै ने उन्हें दी थी, उसे यहूदियों और अधिपतियों और भारत से लेकर कूश तक, जो एक सौ सत्ताईस प्रान्त हैं, उन सभी के अधिपतियों और हाकिमों को एक-एक प्रान्त के अक्षरों में और एक-एक देश के लोगों की भाषा में, और यहूदियों को उनके अक्षरों और भाषा में लिखी गईं।एस्तेर ८:९ · IRV
यह पद अन्य भाषाओं में
- English — Esther 8:9
- Then the king’s scribes were called at that time, in the third month, which is the month Sivan, on the twenty-third day of the month; and it was written according to all that Mordecai commanded to the Jews, and to the local governors, and the governors and princes of the provinces which are from India to Ethiopia, one hundred twenty-seven provinces, to every province according to its writing, and to every people in their language, and to the Jews in their writing, and in their language.
- ગુજરાતી — એસ્તેર ૮:૯
- ત્યારે ત્રીજા મહિનાના એટલે સીવાન મહિનાના ત્રેવીસમા દિવસે રાજાના મંત્રીઓને બોલાવવામાં આવ્યા અને મોર્દખાયની આજ્ઞા પ્રમાણે યહૂદીઓને લગતો એક હુકમ ભારત દેશથી તે કૂશ સુધીના એકસો સત્તાવીશ પ્રાંતના સૂબાઓ, રાજ્યપાલો અને અમલદારોને તે પ્રાંતની ભાષાઓમાં અને લિપિમાં, તેમ જ યહૂદીઓની ભાષા અને લિપિમાં લખાવવામાં આવ્યો.
संदर्भ में
७तब राजा क्षयर्ष ने एस्तेर रानी से और मोर्दकै यहूदी से कहा, “मैं हामान का घरबार तो एस्तेर को दे चुका हूँ, और वह फांसी के खम्भे पर लटका दिया गया है, इसलिए कि उसने यहूदियों पर हाथ उठाया था।
८अतः तुम अपनी समझ के अनुसार राजा के नाम से यहूदियों के नाम पर लिखो, और राजा की मुहर वाली अंगूठी की छाप भी लगाओ; क्योंकि जो चिट्ठी राजा के नाम से लिखी जाए, और उस पर उसकी अंगूठी की छाप लगाई जाए, उसको कोई भी पलट नहीं सकता।”
९उसी समय अर्थात् सीवान नामक तीसरे महीने के तेईसवें दिन को राजा के लेखक बुलवाए गए और जिस-जिस बात की आज्ञा मोर्दकै ने उन्हें दी थी, उसे यहूदियों और अधिपतियों और भारत से लेकर कूश तक, जो एक सौ सत्ताईस प्रान्त हैं, उन सभी के अधिपतियों और हाकिमों को एक-एक प्रान्त के अक्षरों में और एक-एक देश के लोगों की भाषा में, और यहूदियों को उनके अक्षरों और भाषा में लिखी गईं।
१०मोर्दकै ने राजा क्षयर्ष के नाम से चिट्ठियाँ लिखाकर, और उन पर राजा की मुहर वाली अंगूठी की छाप लगाकर, वेग चलनेवाले सरकारी घोड़ों, खच्चरों और साँड़नियों पर सवार हरकारों के हाथ भेज दीं।
११इन चिट्ठियों में सब नगरों के यहूदियों को राजा की ओर से अनुमति दी गई, कि वे इकट्ठे हों और अपना-अपना प्राण बचाने के लिये तैयार होकर, जिस जाति या प्रान्त के लोग अन्याय करके उनको या उनकी स्त्रियों और बाल-बच्चों को दुःख देना चाहें, उनको घात और नाश करें, और उनकी धन-सम्पत्ति लूट लें।
