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Methodist Church Nadiad

एज्रा २

100%

जिनको बाबेल का राजा नबूकदनेस्सर बाबेल को बन्दी बनाकर ले गया था, उनमें से प्रान्त के जो लोग बँधुआई से छूटकर यरूशलेम और यहूदा को अपने-अपने नगर में लौटे वे ये हैं।

ये जरुब्बाबेल, येशुअ, नहेम्याह, सरायाह, रेलायाह, मोर्दकै, बिलशान, मिस्पार, बिगवै, रहूम और बानाह के साथ आए। इस्राएली प्रजा के मनुष्यों की गिनती यह है: अर्थात्

परोश की सन्तान दो हजार एक सौ बहत्तर,

शपत्याह की सन्तान तीन सौ बहत्तर,

आरह की सन्तान सात सौ पचहत्तर,

पहत्मोआब की सन्तान येशुअ और योआब की सन्तान में से दो हजार आठ सौ बारह,

एलाम की सन्तान बारह सौ चौवन,

जत्तू की सन्तान नौ सौ पैंतालीस,

जक्कई की सन्तान सात सौ साठ,

१०बानी की सन्तान छः सौ बयालीस,

११बेबै की सन्तान छः सौ तेईस,

१२अजगाद की सन्तान बारह सौ बाईस,

१३अदोनीकाम की सन्तान छः सौ छियासठ,

१४बिगवै की सन्तान दो हजार छप्पन,

१५आदीन की सन्तान चार सौ चौवन,

१६हिजकिय्याह की सन्तान आतेर की सन्तान में से अठानवे,

१७बेसै की सन्तान तीन सौ तेईस,

१८योरा के लोग एक सौ बारह,

१९हाशूम के लोग दो सौ तेईस,

२०गिब्बार के लोग पंचानबे,

२१बैतलहम के लोग एक सौ तेईस,

२२नतोपा के मनुष्य छप्पन;

२३अनातोत के मनुष्य एक सौ अट्ठाईस,

२४अज्मावेत के लोग बयालीस,

२५किर्यत्यारीम कपीरा और बेरोत के लोग सात सौ तैंतालीस,

२६रामाह और गेबा के लोग छः सौ इक्कीस,

२७मिकमाश के मनुष्य एक सौ बाईस,

२८बेतेल और आई के मनुष्य दो सौ तेईस,

२९नबो के लोग बावन,

३०मग्बीस की सन्तान एक सौ छप्पन,

३१दूसरे एलाम की सन्तान बारह सौ चौवन,

३२हारीम की सन्तान तीन सौ बीस,

३३लोद, हादीद और ओनो के लोग सात सौ पच्चीस,

३४यरीहो के लोग तीन सौ पैंतालीस,

३५सना के लोग तीन हजार छः सौ तीस।

३६फिर याजकों अर्थात् येशुअ के घराने में से यदायाह की सन्तान नौ सौ तिहत्तर,

३७इम्मेर की सन्तान एक हजार बावन,

३८पशहूर की सन्तान बारह सौ सैंतालीस,

३९हारीम की सन्तान एक हजार सत्रह

४०फिर लेवीय, अर्थात् येशुअ की सन्तान और कदमीएल की सन्तान होदव्याह की सन्तान में से चौहत्तर।

४१फिर गवैयों में से आसाप की सन्तान एक सौ अट्ठाईस।

४२फिर दरबानों की सन्तान, शल्लूम की सन्तान, आतेर की सन्तान, तल्मोन की सन्तान, अक्कूब की सन्तान, हतीता की सन्तान, और शोबै की सन्तान, ये सब मिलाकर एक सौ उनतालीस हुए।

४३फिर नतीन की सन्तान, सीहा की सन्तान, हसूपा की सन्तान, तब्बाओत की सन्तान।

४४केरोस की सन्तान, सीअहा की सन्तान, पादोन की सन्तान,

४५लबाना की सन्तान, हगाबा की सन्तान, अक्कूब की सन्तान,

४६हागाब की सन्तान, शल्मै की सन्तान, हानान की सन्तान,

४७गिद्देल की सन्तान, गहर की सन्तान, रायाह की सन्तान,

४८रसीन की सन्तान, नकोदा की सन्तान, गज्जाम की सन्तान,

४९उज्जा की सन्तान, पासेह की सन्तान, बेसै की सन्तान,

५०अस्ना की सन्तान, मूनीम की सन्तान, नपीसीम की सन्तान,

५१बकबूक की सन्तान, हकूपा की सन्तान, हर्हूर की सन्तान।

५२बसलूत की सन्तान, महीदा की सन्तान, हर्शा की सन्तान,

५३बर्कोस की सन्तान, सीसरा की सन्तान, तेमह की सन्तान,

५४नसीह की सन्तान, और हतीपा की सन्तान।

५५फिर सुलैमान के दासों की सन्तान, सोतै की सन्तान, हस्सोपेरेत की सन्तान, परूदा की सन्तान,

५६याला की सन्तान, दर्कोन की सन्तान, गिद्देल की सन्तान,

५७शपत्याह की सन्तान, हत्तील की सन्तान, पोकरेत-सबायीम की सन्तान, और आमी की सन्तान।

५८सब नतीन और सुलैमान के दासों की सन्तान, तीन सौ बानवे थे।

५९फिर जो तेल्मेलाह, तेलहर्शा, करूब, अद्दान और इम्मेर से आए, परन्तु वे अपने-अपने पितरों के घराने और वंशावली न बता सके कि वे इस्राएल के हैं, वे ये हैं:

६०अर्थात् दलायाह की सन्तान, तोबियाह की सन्तान और नकोदा की सन्तान, जो मिलकर छः सौ बावन थे।

६१याजकों की सन्तान में से हबायाह की सन्तान, हक्कोस की सन्तान और बर्जिल्लै की सन्तान, जिसने गिलादी बर्जिल्लै की एक बेटी को ब्याह लिया और उसी का नाम रख लिया था।

६२इन सभी ने अपनी-अपनी वंशावली का पत्र औरों की वंशावली की पोथियों में ढूँढ़ा, परन्तु वे न मिले, इसलिए वे अशुद्ध ठहराकर याजकपद से निकाले गए।

६३और अधिपति ने उनसे कहा, कि जब तक ऊरीम और तुम्मीम धारण करनेवाला कोई याजक न हो, तब तक कोई परमपवित्र वस्तु खाने न पाए।

६४समस्त मण्डली मिलकर बयालीस हजार तीन सौ साठ की थी।

६५इनको छोड़ इनके सात हजार तीन सौ सैंतीस दास-दासियाँ और दो सौ गानेवाले और गानेवालियाँ थीं।

६६उनके घोड़े सात सौ छत्तीस, खच्चर दो सौ पैंतालीस, ऊँट चार सौ पैंतीस,

६७और गदहे छः हजार सात सौ बीस थे।

६८पितरों के घरानों के कुछ मुख्य-मुख्य पुरुषों ने जब यहोवा के भवन को जो यरूशलेम में है, आए, तब परमेश्वर के भवन को उसी के स्थान पर खड़ा करने के लिये अपनी-अपनी इच्छा से कुछ दिया।

६९उन्होंने अपनी-अपनी पूँजी के अनुसार इकसठ हजार दर्कमोन सोना और पाँच हजार माने चाँदी और याजकों के योग्य एक सौ अंगरखे अपनी-अपनी इच्छा से उस काम के खजाने में दे दिए।

७०तब याजक और लेवीय और लोगों में से कुछ और गवैये और द्वारपाल और नतीन लोग अपने नगर में और सब इस्राएली अपने-अपने नगर में फिर बस गए।

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