उत्पत्ति ४७:९
याकूब ने फ़िरौन से कहा, “मैं तो एक सौ तीस वर्ष परदेशी होकर अपना जीवन बिता चुका हूँ; मेरे जीवन के दिन थोड़े और दुःख से भरे हुए भी थे, और मेरे बापदादे परदेशी होकर जितने दिन तक जीवित रहे उतने दिन का मैं अभी नहीं हुआ।”उत्पत्ति ४७:९ · IRV
यह पद अन्य भाषाओं में
- English — Genesis 47:9
- Jacob said to Pharaoh, “The years of my pilgrimage are one hundred thirty years. The days of the years of my life have been few and evil. They have not attained to the days of the years of the life of my fathers in the days of their pilgrimage.”
- ગુજરાતી — ઉત્પત્તિ ૪૭:૯
- યાકૂબે ફારુનને કહ્યું, “મારા જીવનપ્રવાસના એકસો ત્રીસ વર્ષ થયાં છે. એ અતિ પરિશ્રમવાળા રહ્યાં છે. હજી મારા પિતૃઓના પ્રવાસમાં તેઓની ઉંમરના જેટલાં મારા વર્ષો થયાં નથી.”
संदर्भ में
७तब यूसुफ ने अपने पिता याकूब को ले आकर फ़िरौन के सम्मुख खड़ा किया; और याकूब ने फ़िरौन को आशीर्वाद दिया।
८तब फ़िरौन ने याकूब से पूछा, “तेरी आयु कितने दिन की हुई है?”
९याकूब ने फ़िरौन से कहा, “मैं तो एक सौ तीस वर्ष परदेशी होकर अपना जीवन बिता चुका हूँ; मेरे जीवन के दिन थोड़े और दुःख से भरे हुए भी थे, और मेरे बापदादे परदेशी होकर जितने दिन तक जीवित रहे उतने दिन का मैं अभी नहीं हुआ।”
१०और याकूब फ़िरौन को आशीर्वाद देकर उसके सम्मुख से चला गया।
११तब यूसुफ ने अपने पिता और भाइयों को बसा दिया, और फ़िरौन की आज्ञा के अनुसार मिस्र देश के अच्छे से अच्छे भाग में, अर्थात् रामसेस नामक प्रदेश में, भूमि देकर उनको सौंप दिया।
