उत्पत्ति ५०:११
आताद के खलिहान में के विलाप को देखकर उस देश के निवासी कनानियों ने कहा, “यह तो मिस्रियों का कोई भारी विलाप होगा।” इसी कारण उस स्थान का नाम आबेलमिस्रैम पड़ा, और वह यरदन के पार है।उत्पत्ति ५०:११ · IRV
यह पद अन्य भाषाओं में
- English — Genesis 50:11
- When the inhabitants of the land, the Canaanites, saw the mourning in the floor of Atad, they said, “This is a grievous mourning by the Egyptians.” Therefore its name was called Abel Mizraim, which is beyond the Jordan.
- ગુજરાતી — ઉત્પત્તિ ૫૦:૧૧
- આટાદની ખળીમાં તે દેશના કનાનીઓએ તે શોકનું વાતાવરણ જોયું, ત્યારે તેઓ બોલ્યા, “મિસરીઓના માટે આ એક શોકની મોટી જગ્યા છે.” તે માટે તે જગ્યાનું નામ આબેલ-મિસરાઈમ કહેવાય છે, જે યર્દન પાર છે.
संदर्भ में
९और उसके संग रथ और सवार गए, इस प्रकार भीड़ बहुत भारी हो गई।
१०जब वे आताद के खलिहान तक, जो यरदन नदी के पार है, पहुँचे, तब वहाँ अत्यन्त भारी विलाप किया, और यूसुफ ने अपने पिता के लिये सात दिन का विलाप कराया।
११आताद के खलिहान में के विलाप को देखकर उस देश के निवासी कनानियों ने कहा, “यह तो मिस्रियों का कोई भारी विलाप होगा।” इसी कारण उस स्थान का नाम आबेलमिस्रैम पड़ा, और वह यरदन के पार है।
१२इस्राएल के पुत्रों ने ठीक वही काम किया जिसकी उसने उनको आज्ञा दी थी:
१३अर्थात् उन्होंने उसको कनान देश में ले जाकर मकपेला की उस भूमिवाली गुफा में, जो मम्रे के सामने हैं, मिट्टी दी; जिसको अब्राहम ने हित्ती एप्रोन के हाथ से इसलिए मोल लिया था, कि वह कब्रिस्तान के लिये उसकी निज भूमि हो।
