हबक्कूक २:५
दाखमधु से धोखा होता है; अहंकारी पुरुष घर में नहीं रहता, और उसकी लालसा अधोलोक के समान पूरी नहीं होती, और मृत्यु के समान उसका पेट नहीं भरता। वह सब जातियों को अपने पास खींच लेता, और सब देशों के लोगों को अपने पास इकट्ठे कर रखता है।”हबक्कूक २:५ · IRV
यह पद अन्य भाषाओं में
- English — Habakkuk 2:5
- Yes, moreover, wine is treacherous: an arrogant man who doesn’t stay at home, who enlarges his desire as Sheol; he is like death and can’t be satisfied, but gathers to himself all nations and heaps to himself all peoples.
- ગુજરાતી — હબાક્કુક ૨:૫
- કેમ કે દ્રાક્ષારસ તો તેનો વિશ્વાસઘાત કરે છે, તે ઘમંડી છે, જેથી તે ઘરે ન રહેતાં બહાર ભટકે છે, તે પોતાની લાલસા વધારીને કબર જેવી કરે છે, તે મોતની પેઠે કદી તૃપ્ત થતી નથી. તે દરેક પ્રજાને અને લોકોને પોતાના માટે ભેગા કરે છે.
संदर्भ में
३क्योंकि इस दर्शन की बात नियत समय में पूरी होनेवाली है , वरन् इसके पूरे होने का समय वेग से आता है; इसमें धोखा न होगा। चाहे इसमें विलम्ब भी हो, तो भी उसकी बाट जोहते रहना; क्योंकि वह निश्चय पूरी होगी और उसमें देर न होगी।
४देख, उसका मन फूला हुआ है, उसका मन सीधा नहीं है; परन्तु धर्मी अपने विश्वास के द्वारा जीवित रहेगा। (इब्रा. 10:37, 38, 2 पत. 3:9, रोम. 1:17, गला. 3:11)
५दाखमधु से धोखा होता है; अहंकारी पुरुष घर में नहीं रहता, और उसकी लालसा अधोलोक के समान पूरी नहीं होती, और मृत्यु के समान उसका पेट नहीं भरता। वह सब जातियों को अपने पास खींच लेता, और सब देशों के लोगों को अपने पास इकट्ठे कर रखता है।”
६क्या वे सब उसका दृष्टान्त चलाकर, और उस पर ताना मारकर न कहेंगे “हाय उस पर जो पराया धन छीन छीनकर धनवान हो जाता है? कब तक? हाय उस पर जो अपना घर बन्धक की वस्तुओं से भर लेता है!”
७जो तुझ से कर्ज लेते हैं, क्या वे लोग अचानक न उठेंगे? और क्या वे न जागेंगे जो तुझको संकट में डालेंगे?
