Skip to content
Methodist Church Nadiad

इब्रानियों ११:५

विश्वास ही से हनोक उठा लिया गया, कि मृत्यु को न देखे, और उसका पता नहीं मिला; क्योंकि परमेश्वर ने उसे उठा लिया था, और उसके उठाए जाने से पहले उसकी यह गवाही दी गई थी, कि उसने परमेश्वर को प्रसन्न किया है। (उत्प. 5:21-24)

इब्रानियों ११:५ · IRV

यह पद अन्य भाषाओं में

EnglishHebrews 11:5
By faith Enoch was taken away, so that he wouldn’t see death, and he was not found, because God translated him. For he has had testimony given to him that before his translation he had been well pleasing to God.
ગુજરાતીહિબ્રૂઓને પત્ર ૧૧:૫
વિશ્વાસથી હનોખને ઉપર લઈ લેવામાં આવ્યો કે તે મૃત્યુનો અનુભવ કરે નહિ અને તે અદ્રશ્ય થયો, કેમ કે ઈશ્વર તેને ઉપર લઈ ગયા હતા, તેને ઉપર લઈ લેવામાં આવ્યો તે પહેલાં તેના સંબંધી એ સાક્ષી થઈ કે ‘ઈશ્વર તેના પર પ્રસન્ન હતા.’”

संदर्भ में

विश्वास ही से हम जान जाते हैं, कि सारी सृष्टि की रचना परमेश्वर के वचन के द्वारा हुई है। यह नहीं, कि जो कुछ देखने में आता है, वह देखी हुई वस्तुओं से बना हो। (उत्प. 1:1, यूह. 1:3, भज. 33:6-9)

विश्वास ही से हाबिल ने कैन से उत्तम बलिदान परमेश्वर के लिये चढ़ाया; और उसी के द्वारा उसके धर्मी होने की गवाही भी दी गई: क्योंकि परमेश्वर ने उसकी भेंटों के विषय में गवाही दी; और उसी के द्वारा वह मरने पर भी अब तक बातें करता है। (उत्प. 4:3-5)

विश्वास ही से हनोक उठा लिया गया, कि मृत्यु को न देखे, और उसका पता नहीं मिला; क्योंकि परमेश्वर ने उसे उठा लिया था, और उसके उठाए जाने से पहले उसकी यह गवाही दी गई थी, कि उसने परमेश्वर को प्रसन्न किया है। (उत्प. 5:21-24)

और विश्वास बिना उसे प्रसन्न करना अनहोना है , क्योंकि परमेश्वर के पास आनेवाले को विश्वास करना चाहिए, कि वह है; और अपने खोजनेवालों को प्रतिफल देता है।

विश्वास ही से नूह ने उन बातों के विषय में जो उस समय दिखाई न पड़ती थीं, चेतावनी पाकर भक्ति के साथ अपने घराने के बचाव के लिये जहाज बनाया, और उसके द्वारा उसने संसार को दोषी ठहराया; और उस धार्मिकता का वारिस हुआ, जो विश्वास से होता है। (उत्प. 6:13-22, उत्प. 7:1)

पूरा अध्याय पढ़ें

Ask us anything

Try asking

This assistant searches this website and the Bible, and uses AI for general questions about the Bible — those answers are marked. It cannot answer everything; for anything personal, please speak to our pastors.