यशायाह ५०:२
इसका क्या कारण है कि जब मैं आया तब कोई न मिला? और जब मैंने पुकारा, तब कोई न बोला? क्या मेरा हाथ ऐसा छोटा हो गया है कि छुड़ा नहीं सकता? क्या मुझ में उद्धार करने की शक्ति नहीं? देखो, मैं एक धमकी से समुद्र को सूखा देता हूँ, मैं महानदों को रेगिस्तान बना देता हूँ; उनकी मछलियाँ जल बिना मर जाती और बसाती हैं।यशायाह ५०:२ · IRV
यह पद अन्य भाषाओं में
- English — Isaiah 50:2
- Why, when I came, was there no one? When I called, why was there no one to answer? Is my hand shortened at all, that it can’t redeem? Or have I no power to deliver? Behold, at my rebuke I dry up the sea. I make the rivers a wilderness. Their fish stink because there is no water, and die of thirst.
- ગુજરાતી — યશાયા ૫૦:૨
- હું શા માટે આવ્યો પણ ત્યાં કોઈ હતું નહિ? મેં શા માટે પોકાર કર્યો પણ કોઈએ જવાબ આપ્યો નહિ? શું મારો હાથ એટલો બધો ટૂંકો થઈ ગયો છે કે તમને છોડાવી શકે નહિ? શું તમને બચાવવા માટે મારામાં શક્તિ નથી? જુઓ, મારા ઠપકાથી હું સમુદ્રને સૂકવી નાખું છું; હું નદીઓને રણ કરી નાખું છું; તેમાંની માછલીઓ પાણી વિના મરી જાય છે અને ગંધાઈ ઊઠે છે.
संदर्भ में
१“तुम्हारी माता का त्यागपत्र कहाँ है, जिसे मैंने उसे त्यागते समय दिया था? या मैंने किस व्यापारी के हाथ तुम्हें बेचा?” यहोवा यह कहता है, “सुनो, तुम अपने ही अधर्म के कामों के कारण बिक गए, और तुम्हारे ही अपराधों के कारण तुम्हारी माता छोड़ दी गई।
२इसका क्या कारण है कि जब मैं आया तब कोई न मिला? और जब मैंने पुकारा, तब कोई न बोला? क्या मेरा हाथ ऐसा छोटा हो गया है कि छुड़ा नहीं सकता? क्या मुझ में उद्धार करने की शक्ति नहीं? देखो, मैं एक धमकी से समुद्र को सूखा देता हूँ, मैं महानदों को रेगिस्तान बना देता हूँ; उनकी मछलियाँ जल बिना मर जाती और बसाती हैं।
३मैं आकाश को मानो शोक का काला कपड़ा पहनाता, और टाट को उनका ओढ़ना बना देता हूँ।”
४प्रभु यहोवा ने मुझे सीखनेवालों की जीभ दी है कि मैं थके हुए को अपने वचन के द्वारा सम्भालना जानूँ। भोर को वह नित मुझे जगाता और मेरा कान खोलता है कि मैं शिष्य के समान सुनूँ।
