यशायाह ६६:१
यहोवा यह कहता है: “आकाश मेरा सिंहासन और पृथ्वी मेरे चरणों की चौकी है; तुम मेरे लिये कैसा भवन बनाओगे, और मेरे विश्राम का कौन सा स्थान होगा? (प्रेरि. 7:48-50, मत्ती 5:34,35)यशायाह ६६:१ · IRV
यह पद अन्य भाषाओं में
- English — Isaiah 66:1
- The LORD says: “Heaven is my throne, and the earth is my footstool. What kind of house will you build to me? Where will I rest?
- ગુજરાતી — યશાયા ૬૬:૧
- યહોવાહ એવું કહે છે: “આકાશ મારું સિંહાસન છે અને પૃથ્વી મારું પાયાસન છે. તો મારે માટે તમે ક્યાં ઘર બાંધશો? જ્યાં હું નિવાસ કરી શકું તે સ્થાન ક્યાં છે?
संदर्भ में
१यहोवा यह कहता है: “आकाश मेरा सिंहासन और पृथ्वी मेरे चरणों की चौकी है; तुम मेरे लिये कैसा भवन बनाओगे, और मेरे विश्राम का कौन सा स्थान होगा? (प्रेरि. 7:48-50, मत्ती 5:34,35)
२यहोवा की यह वाणी है, ये सब वस्तुएँ मेरे ही हाथ की बनाई हुई हैं, इसलिए ये सब मेरी ही हैं। परन्तु मैं उसी की ओर दृष्टि करूँगा जो दीन और खेदित मन का हो, और मेरा वचन सुनकर थरथराता हो। (भज. 34:18, मत्ती 5:3)
३“बैल का बलि करनेवाला मनुष्य के मार डालनेवाले के समान है; जो भेड़ का चढ़ानेवाला है वह उसके समान है जो कुत्ते का गला काटता है; जो अन्नबलि चढ़ाता है वह मानो सूअर का लहू चढ़ानेवाले के समान है; और जो लोबान जलाता है, वह उसके समान है जो मूरत को धन्य कहता है। इन सभी ने अपना-अपना मार्ग चुन लिया है, और घिनौनी वस्तुओं से उनके मन प्रसन्न होते हैं।
