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वह उस वृक्ष के समान होगा जो नदी के किनारे पर लगा हो और उसकी जड़ जल के पास फैली हो; जब धूप होगी तब उसको न लगेगी, उसके पत्ते हरे रहेंगे, और सूखे वर्ष में भी उनके विषय में कुछ चिन्ता न होगी, क्योंकि वह तब भी फलता रहेगा।”

यिर्मयाह १७:८ · IRV

यह पद अन्य भाषाओं में

EnglishJeremiah 17:8
For he will be as a tree planted by the waters, who spreads out its roots by the river, and will not fear when heat comes, but its leaf will be green, and will not be concerned in the year of drought. It won’t cease from yielding fruit.
ગુજરાતીયર્મિયા ૧૭:૮
તે પાણીની પાસે રોપેલા ઝાડ જેવો થશે, જે નદીની પાસે પોતાના મૂળ ફેલાવે છે ગરમીમાં તેને કશો ડર લાગશે નહિ. તેનાં પાંદડાં લીલાં રહેશે. દુકાળના વર્ષમાં તેને કશી ચિંતા રહેશે નહિ. તે ફળ આપ્યા વગર રહેશે નહિ.

संदर्भ में

वह निर्जल देश के अधमरे पेड़ के समान होगा और कभी भलाई न देखेगा। वह निर्जल और निर्जन तथा लोनछाई भूमि पर बसेगा।

“धन्य है वह पुरुष जो यहोवा पर भरोसा रखता है, जिसने परमेश्वर को अपना आधार माना हो।

वह उस वृक्ष के समान होगा जो नदी के किनारे पर लगा हो और उसकी जड़ जल के पास फैली हो; जब धूप होगी तब उसको न लगेगी, उसके पत्ते हरे रहेंगे, और सूखे वर्ष में भी उनके विषय में कुछ चिन्ता न होगी, क्योंकि वह तब भी फलता रहेगा।”

मन तो सब वस्तुओं से अधिक धोखा देनेवाला होता है, उसमें असाध्य रोग लगा है; उसका भेद कौन समझ सकता है?

१०“मैं यहोवा मन को खोजता और हृदय को जाँचता हूँ ताकि प्रत्येक जन को उसकी चाल-चलन के अनुसार अर्थात् उसके कामों का फल दूँ।” (1 पत. 1:17, प्रका. 2:23, प्रका. 20:12,13, प्रका. 22:12)

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