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Methodist Church Nadiad
फिर जो मिट्टी के घरों में रहते हैं, और जिनकी नींव मिट्टी में डाली गई है, और जो पतंगे के समान पिस जाते हैं, उनकी क्या गणना। (2 कुरि. 5:1)

अय्यूब ४:१९ · IRV

यह पद अन्य भाषाओं में

EnglishJob 4:19
How much more those who dwell in houses of clay, whose foundation is in the dust, who are crushed before the moth!
ગુજરાતીઅયૂબ ૪:૧૯
તો ધૂળમાં નાખેલા પાયાવાળા માટીનાં ઘરોમાં રહેનાર, જેઓ પતંગિયાની જેમ કચરાઈ જાય છે. તેઓને તે કેટલા અધિક ગણશે?

संदर्भ में

१७‘क्या नाशवान मनुष्य परमेश्वर से अधिक धर्मी होगा? क्या मनुष्य अपने सृजनहार से अधिक पवित्र हो सकता है?

१८देख, वह अपने सेवकों पर भरोसा नहीं रखता, और अपने स्वर्गदूतों को दोषी ठहराता है;

१९फिर जो मिट्टी के घरों में रहते हैं, और जिनकी नींव मिट्टी में डाली गई है, और जो पतंगे के समान पिस जाते हैं, उनकी क्या गणना। (2 कुरि. 5:1)

२०वे भोर से साँझ तक नाश किए जाते हैं , वे सदा के लिये मिट जाते हैं, और कोई उनका विचार भी नहीं करता।

२१क्या उनके डेरे की डोरी उनके अन्दर ही अन्दर नहीं कट जाती? वे बिना बुद्धि के ही मर जाते हैं?’

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