विलापगीत ४:१७
हमारी आँखें व्यर्थ ही सहायता की बाट जोहते-जोहते धुँधली पड़ गई हैं, हम लगातार एक ऐसी जाति की ओर ताकते रहे जो बचा नहीं सकी।विलापगीत ४:१७ · IRV
यह पद अन्य भाषाओं में
- English — Lamentations 4:17
- Our eyes still fail, looking in vain for our help. In our watching we have watched for a nation that could not save.
- ગુજરાતી — યર્મિયાનો વિલાપ ૪:૧૭
- અમારી આંખો નિરર્થક સહાયની રાહ જોઈ જોઈને થાકી ગઈ છે, અમને બચાવી શકે એવા પ્રજાની અમે ઘણી અપેક્ષા કરી છે, પણ તે વ્યર્થ થઈ છે.
संदर्भ में
१५लोग उनको पुकारकर कहते हैं, “अरे अशुद्ध लोगों, हट जाओ! हट जाओ! हमको मत छूओ” जब वे भागकर मारे-मारे फिरने लगे, तब अन्यजाति लोगों ने कहा, “भविष्य में वे यहाँ टिकने नहीं पाएँगे।”
१६यहोवा ने अपने कोप से उन्हें तितर-बितर किया , वह फिर उन पर दयादृष्टि न करेगा; न तो याजकों का सम्मान हुआ, और न पुरनियों पर कुछ अनुग्रह किया गया।
१७हमारी आँखें व्यर्थ ही सहायता की बाट जोहते-जोहते धुँधली पड़ गई हैं, हम लगातार एक ऐसी जाति की ओर ताकते रहे जो बचा नहीं सकी।
१८लोग हमारे पीछे ऐसे पड़े कि हम अपने नगर के चौकों में भी नहीं चल सके; हमारा अन्त निकट आया; हमारी आयु पूरी हुई; क्योंकि हमारा अन्त आ गया था।
१९हमारे खदेड़नेवाले आकाश के उकाबों से भी अधिक वेग से चलते थे; वे पहाड़ों पर हमारे पीछे पड़ गए और जंगल में हमारे लिये घात लगाकर बैठ गए।
