विलापगीत ४:५
जो स्वादिष्ट भोजन खाते थे, वे अब सड़कों में व्याकुल फिरते हैं; जो मखमल के वस्त्रों में पले थे अब घूरों पर लेटते हैं।विलापगीत ४:५ · IRV
यह पद अन्य भाषाओं में
- English — Lamentations 4:5
- Those who ate delicacies are desolate in the streets. Those who were brought up in purple embrace dunghills.
- ગુજરાતી — યર્મિયાનો વિલાપ ૪:૫
- જેઓ મિષ્ટાન્ન ખાતા હતા, તેઓ શેરીઓમાં નિરાધાર થયા છે; જેઓ રેશમી વસ્ત્રો પહેરતા હતા તેઓ ઉકરડા પર ગંદકીમાં આળોટે છે.
संदर्भ में
३गीदड़िन भी अपने बच्चों को थन से लगाकर पिलाती है, परन्तु मेरे लोगों की बेटी वन के शुतुर्मुर्गों के तुल्य निर्दयी हो गई है।
४दूध-पीते बच्चों की जीभ प्यास के मारे तालू में चिपट गई है; बाल-बच्चे रोटी माँगते हैं, परन्तु कोई उनको नहीं देता।
५जो स्वादिष्ट भोजन खाते थे, वे अब सड़कों में व्याकुल फिरते हैं; जो मखमल के वस्त्रों में पले थे अब घूरों पर लेटते हैं।
६मेरे लोगों की बेटी का अधर्म सदोम के पाप से भी अधिक हो गया जो किसी के हाथ डाले बिना भी क्षण भर में उलट गया था।
७उसके कुलीन हिम से निर्मल और दूध से भी अधिक उज्जवल थे; उनकी देह मूँगों से अधिक लाल, और उनकी सुन्दरता नीलमणि की सी थी।
