मीका ७:१
हाय मुझ पर! क्योंकि मैं उस जन के समान हो गया हूँ जो धूपकाल के फल तोड़ने पर, या रही हुई दाख बीनने के समय के अन्त में आ जाए, मुझे तो पक्की अंजीरों की लालसा थी, परन्तु खाने के लिये कोई गुच्छा नहीं रहा।मीका ७:१ · IRV
यह पद अन्य भाषाओं में
- English — Micah 7:1
- Misery is mine! Indeed, I am like one who gathers the summer fruits, as gleanings of the vineyard. There is no cluster of grapes to eat. My soul desires to eat the early fig.
- ગુજરાતી — મીખાહ ૭:૧
- મને અફસોસ છે! કેમ કે ઉનાળાંનાં ફળ વીણી લીધા પછીની જેવી સ્થિતિ, એટલે દ્રાક્ષો વીણી લીધા પછી બચી ગયેલી દ્રાક્ષો જેવી મારી સ્થિતિ છે: ત્યાં ફળની ગુચ્છાઓ મળશે નહિ, પ્રથમ અંજીર જેને માટે હું તલસું છું તે પણ નહિ મળે.
संदर्भ में
१हाय मुझ पर! क्योंकि मैं उस जन के समान हो गया हूँ जो धूपकाल के फल तोड़ने पर, या रही हुई दाख बीनने के समय के अन्त में आ जाए, मुझे तो पक्की अंजीरों की लालसा थी, परन्तु खाने के लिये कोई गुच्छा नहीं रहा।
२भक्त लोग पृथ्वी पर से नाश हो गए हैं, और मनुष्यों में एक भी सीधा जन नहीं रहा; वे सब के सब हत्या के लिये घात लगाते, और जाल लगाकर अपने-अपने भाई का आहेर करते हैं।
३वे अपने दोनों हाथों से मन लगाकर बुराई करते हैं; हाकिम घूस माँगता, और न्यायी घूस लेने को तैयार रहता है, और रईस अपने मन की दुष्टता वर्णन करता है; इसी प्रकार से वे सब मिलकर जालसाजी करते हैं।
