Skip to content
Methodist Church Nadiad
उन्हीं दिनों में मैंने यहूदा में बहुतों को देखा जो विश्रामदिन को हौदों में दाख रौंदते, और पूलियों को ले आते, और गदहों पर लादते थे; वैसे ही वे दाखमधु, दाख, अंजीर और कई प्रकार के बोझ विश्रामदिन को यरूशलेम में लाते थे; तब जिस दिन वे भोजनवस्तु बेचते थे, उसी दिन मैंने उनको चिता दिया।

नहेम्याह १३:१५ · IRV

यह पद अन्य भाषाओं में

EnglishNehemiah 13:15
In those days I saw some men treading wine presses on the Sabbath in Judah, bringing in sheaves, and loading donkeys with wine, grapes, figs, and all kinds of burdens which they brought into Jerusalem on the Sabbath day; and I testified against them in the day in which they sold food.
ગુજરાતીનહેમ્યા ૧૩:૧૫
તે સમયે યહૂદિયામાં મેં કેટલાક લોકોને વિશ્રામવારના દિવસે દ્રાક્ષચક્કીમાં દ્રાક્ષ પીલતા તથા અનાજની ગૂણો અંદર લાવી ગધેડા પર લાદતા અને દ્રાક્ષારસ, દ્રાક્ષો, અંજીર તથા સર્વ પ્રકારના ભાર યરુશાલેમમાં લાવતા જોયા. તેઓને અન્ન વેચતા પણ મેં જોયા, ત્યારે મેં તે દિવસે તેઓની સામે વાંધો લીધો.

संदर्भ में

१३मैंने भण्डारों के अधिकारी शेलेम्याह याजक और सादोक मुंशी को, और लेवियों में से पदायाह को, और उनके नीचे हानान को, जो मत्तन्याह का पोता और जक्कूर का पुत्र था, नियुक्त किया; वे तो विश्वासयोग्य गिने जाते थे, और अपने भाइयों के मध्य बाँटना उनका काम था।

१४हे मेरे परमेश्वर! मेरा यह काम मेरे हित के लिये स्मरण रख, और जो-जो सुकर्म मैंने अपने परमेश्वर के भवन और उसमें की आराधना के विषय किए हैं उन्हें मिटा न डाल।

१५उन्हीं दिनों में मैंने यहूदा में बहुतों को देखा जो विश्रामदिन को हौदों में दाख रौंदते, और पूलियों को ले आते, और गदहों पर लादते थे; वैसे ही वे दाखमधु, दाख, अंजीर और कई प्रकार के बोझ विश्रामदिन को यरूशलेम में लाते थे; तब जिस दिन वे भोजनवस्तु बेचते थे, उसी दिन मैंने उनको चिता दिया।

१६फिर उसमें सोरी लोग रहकर मछली और कई प्रकार का सौदा ले आकर, यहूदियों के हाथ यरूशलेम में विश्रामदिन को बेचा करते थे।

१७तब मैंने यहूदा के रईसों को डाँटकर कहा, “तुम लोग यह क्या बुराई करते हो, जो विश्रामदिन को अपवित्र करते हो?

पूरा अध्याय पढ़ें

Ask us anything

Try asking

This assistant searches this website and the Bible, and uses AI for general questions about the Bible — those answers are marked. It cannot answer everything; for anything personal, please speak to our pastors.