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वह उस वृक्ष के समान है, जो बहती पानी की धाराओं के किनारे लगाया गया है और अपनी ऋतु में फलता है, और जिसके पत्ते कभी मुरझाते नहीं। और जो कुछ वह पुरुष करे वह सफल होता है।

भजन संहिता १:३ · IRV

यह पद अन्य भाषाओं में

EnglishPsalms 1:3
He will be like a tree planted by the streams of water, that produces its fruit in its season, whose leaf also does not wither. Whatever he does shall prosper.
ગુજરાતીગીતશાસ્ત્ર ૧:૩
તે નદીના કિનારે રોપાયેલાં વૃક્ષ જેવો થશે, જે પોતાનાં ફળ પોતાની ઋતુ પ્રમાણે આપે છે, જેનાં પાંદડાં કદી પણ કરમાતાં નથી, તે જે કંઈ કરે છે તે સફળ થાય છે.

संदर्भ में

क्या ही धन्य है वह मनुष्य जो दुष्टों की योजना पर नहीं चलता, और न पापियों के मार्ग में खड़ा होता; और न ठट्ठा करनेवालों की मण्डली में बैठता है!

परन्तु वह तो यहोवा की व्यवस्था से प्रसन्न रहता; और उसकी व्यवस्था पर रात-दिन ध्यान करता रहता है।

वह उस वृक्ष के समान है, जो बहती पानी की धाराओं के किनारे लगाया गया है और अपनी ऋतु में फलता है, और जिसके पत्ते कभी मुरझाते नहीं। और जो कुछ वह पुरुष करे वह सफल होता है।

दुष्ट लोग ऐसे नहीं होते, वे उस भूसी के समान होते हैं, जो पवन से उड़ाई जाती है।

इस कारण दुष्ट लोग अदालत में स्थिर न रह सकेंगे, और न पापी धर्मियों की मण्डली में ठहरेंगे;

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