भजन संहिता १:३
वह उस वृक्ष के समान है, जो बहती पानी की धाराओं के किनारे लगाया गया है और अपनी ऋतु में फलता है, और जिसके पत्ते कभी मुरझाते नहीं। और जो कुछ वह पुरुष करे वह सफल होता है।भजन संहिता १:३ · IRV
यह पद अन्य भाषाओं में
- English — Psalms 1:3
- He will be like a tree planted by the streams of water, that produces its fruit in its season, whose leaf also does not wither. Whatever he does shall prosper.
- ગુજરાતી — ગીતશાસ્ત્ર ૧:૩
- તે નદીના કિનારે રોપાયેલાં વૃક્ષ જેવો થશે, જે પોતાનાં ફળ પોતાની ઋતુ પ્રમાણે આપે છે, જેનાં પાંદડાં કદી પણ કરમાતાં નથી, તે જે કંઈ કરે છે તે સફળ થાય છે.
संदर्भ में
१क्या ही धन्य है वह मनुष्य जो दुष्टों की योजना पर नहीं चलता, और न पापियों के मार्ग में खड़ा होता; और न ठट्ठा करनेवालों की मण्डली में बैठता है!
२परन्तु वह तो यहोवा की व्यवस्था से प्रसन्न रहता; और उसकी व्यवस्था पर रात-दिन ध्यान करता रहता है।
३वह उस वृक्ष के समान है, जो बहती पानी की धाराओं के किनारे लगाया गया है और अपनी ऋतु में फलता है, और जिसके पत्ते कभी मुरझाते नहीं। और जो कुछ वह पुरुष करे वह सफल होता है।
४दुष्ट लोग ऐसे नहीं होते, वे उस भूसी के समान होते हैं, जो पवन से उड़ाई जाती है।
५इस कारण दुष्ट लोग अदालत में स्थिर न रह सकेंगे, और न पापी धर्मियों की मण्डली में ठहरेंगे;
