भजन संहिता १०४:१५
और दाखमधु जिससे मनुष्य का मन आनन्दित होता है, और तेल जिससे उसका मुख चमकता है, और अन्न जिससे वह सम्भल जाता है।भजन संहिता १०४:१५ · IRV
यह पद अन्य भाषाओं में
- English — Psalms 104:15
- wine that makes the heart of man glad, oil to make his face to shine, and bread that strengthens man’s heart.
- ગુજરાતી — ગીતશાસ્ત્ર ૧૦૪:૧૫
- તે માણસને આનંદ આપનાર દ્રાક્ષારસ, તેના મુખને તેજસ્વી કરનાર તેલ અને તેના જીવનને બળ આપનાર રોટલી તે નિપજાવે છે.
संदर्भ में
१३तू अपनी अटारियों में से पहाड़ों को सींचता है, तेरे कामों के फल से पृथ्वी तृप्त रहती है।
१४तू पशुओं के लिये घास, और मनुष्यों के काम के लिये अन्न आदि उपजाता है, और इस रीति भूमि से वह भोजन-वस्तुएँ उत्पन्न करता है
१५और दाखमधु जिससे मनुष्य का मन आनन्दित होता है, और तेल जिससे उसका मुख चमकता है, और अन्न जिससे वह सम्भल जाता है।
१६यहोवा के वृक्ष तृप्त रहते हैं, अर्थात् लबानोन के देवदार जो उसी के लगाए हुए हैं।
१७उनमें चिड़ियाँ अपने घोंसले बनाती हैं; सारस का बसेरा सनोवर के वृक्षों में होता है।
