भजन संहिता १०९:१७
वह श्राप देने से प्रीति रखता था, और श्राप उस पर आ पड़ा; वह आशीर्वाद देने से प्रसन्न न होता था, इसलिए आशीर्वाद उससे दूर रहा।भजन संहिता १०९:१७ · IRV
यह पद अन्य भाषाओं में
- English — Psalms 109:17
- Yes, he loved cursing, and it came to him. He didn’t delight in blessing, and it was far from him.
- ગુજરાતી — ગીતશાસ્ત્ર ૧૦૯:૧૭
- બીજાઓને શાપ આપવામાં તે ખુશ હતો; માટે એ શાપ તેને લાગો. તે આશીર્વાદને ધિક્કારતો; તેથી તેના પર કોઈ આશીર્વાદ ન આવો.
संदर्भ में
१५वह निरन्तर यहोवा के सम्मुख रहे, वह उनका नाम पृथ्वी पर से मिटे!
१६क्योंकि वह दुष्ट, करुणा करना भूल गया वरन् दीन और दरिद्र को सताता था और मार डालने की इच्छा से खेदित मनवालों के पीछे पड़ा रहता था।
१७वह श्राप देने से प्रीति रखता था, और श्राप उस पर आ पड़ा; वह आशीर्वाद देने से प्रसन्न न होता था, इसलिए आशीर्वाद उससे दूर रहा।
१८वह श्राप देना वस्त्र के समान पहनता था, और वह उसके पेट में जल के समान और उसकी हड्डियों में तेल के समान समा गया।
१९वह उसके लिये ओढ़ने का काम दे, और फेंटे के समान उसकी कमर में नित्य कसा रहे।
