भजन संहिता ३१:१८
जो अहंकार और अपमान से धर्मी की निन्दा करते हैं, उनके झूठ बोलनेवाले मुँह बन्द किए जाएँ। (भज. 94:4, भज. 120:2)भजन संहिता ३१:१८ · IRV
यह पद अन्य भाषाओं में
- English — Psalms 31:18
- Let the lying lips be mute, which speak against the righteous insolently, with pride and contempt.
- ગુજરાતી — ગીતશાસ્ત્ર ૩૧:૧૮
- જે જૂઠા હોઠ ન્યાયી માણસોની વિરુદ્ધ ગર્વથી તથા તિરસ્કારથી અભિમાની વાત બોલે છે તે મૂંગા થાઓ.
संदर्भ में
१६अपने दास पर अपने मुँह का प्रकाश चमका; अपनी करुणा से मेरा उद्धार कर।
१७हे यहोवा, मुझे लज्जित न होने दे क्योंकि मैंने तुझको पुकारा है; दुष्ट लज्जित हों और वे पाताल में चुपचाप पड़े रहें।
१८जो अहंकार और अपमान से धर्मी की निन्दा करते हैं, उनके झूठ बोलनेवाले मुँह बन्द किए जाएँ। (भज. 94:4, भज. 120:2)
१९आहा, तेरी भलाई क्या ही बड़ी है जो तूने अपने डरवैयों के लिये रख छोड़ी है, और अपने शरणागतों के लिये मनुष्यों के सामने प्रगट भी की है।
२०तू उन्हें दर्शन देने के गुप्त स्थान में मनुष्यों की बुरी गोष्ठी से गुप्त रखेगा; तू उनको अपने मण्डप में झगड़े-रगड़े से छिपा रखेगा।
