भजन संहिता ८४:६
वे रोने की तराई में जाते हुए उसको सोतों का स्थान बनाते हैं; फिर बरसात की अगली वृष्टि उसमें आशीष ही आशीष उपजाती है।भजन संहिता ८४:६ · IRV
यह पद अन्य भाषाओं में
- English — Psalms 84:6
- Passing through the valley of Weeping, they make it a place of springs. Yes, the autumn rain covers it with blessings.
- ગુજરાતી — ગીતશાસ્ત્ર ૮૪:૬
- રુદનના નીચાણને ઓળંગતા તેઓ તેને ઝરાની જગ્યા બનાવે છે. પ્રથમ વરસાદ તેને આશીર્વાદથી ભરપૂર કરશે.
संदर्भ में
४क्या ही धन्य हैं वे, जो तेरे भवन में रहते हैं; वे तेरी स्तुति निरन्तर करते रहेंगे। (सेला)
५क्या ही धन्य है वह मनुष्य, जो तुझ से शक्ति पाता है, और वे जिनको सिय्योन की सड़क की सुधि रहती है।
६वे रोने की तराई में जाते हुए उसको सोतों का स्थान बनाते हैं; फिर बरसात की अगली वृष्टि उसमें आशीष ही आशीष उपजाती है।
७वे बल पर बल पाते जाते हैं ; उनमें से हर एक जन सिय्योन में परमेश्वर को अपना मुँह दिखाएगा।
८हे सेनाओं के परमेश्वर यहोवा, मेरी प्रार्थना सुन, हे याकूब के परमेश्वर, कान लगा! (सेला)
