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Methodist Church Nadiad
फिर मैंने दूसरी बार उससे पूछा, “जैतून की दोनों डालियाँ क्या हैं जो सोने की दोनों नालियों के द्वारा अपने में से सुनहरा तेल उण्डेलती हैं?”

जकर्याह ४:१२ · IRV

यह पद अन्य भाषाओं में

EnglishZechariah 4:12
I asked him the second time, “What are these two olive branches, which are beside the two golden spouts that pour the golden oil out of themselves?”
ગુજરાતીઝખાર્યા ૪:૧૨
વળી મેં ફરીથી તેની સાથે વાત કરીને કહ્યું, “જૈતૂન વૃક્ષની આ બે ડાળીઓ કે જે સોનાની બે દિવેટો છે. તેમાંથી તેલનો પ્રવાહ વહે છે તેઓ શું છે?”

संदर्भ में

१०क्योंकि किसने छोटी बातों का दिन तुच्छ जाना है? यहोवा अपनी इन सातों आँखों से सारी पृथ्वी पर दृष्टि करके साहुल को जरुब्बाबेल के हाथ में देखेगा, और आनन्दित होगा।” (नीति. 15:3)

११तब मैंने उससे फिर पूछा, “ये दो जैतून के वृक्ष क्या हैं जो दीवट की दाहिनी-बाईं ओर हैं?” (प्रका. 11:4)

१२फिर मैंने दूसरी बार उससे पूछा, “जैतून की दोनों डालियाँ क्या हैं जो सोने की दोनों नालियों के द्वारा अपने में से सुनहरा तेल उण्डेलती हैं?”

१३उसने मुझसे कहा, “क्या तू नहीं जानता कि ये क्या हैं?” मैंने कहा, “हे मेरे प्रभु, मैं नहीं जानता।”

१४तब उसने कहा, “इनका अर्थ ताजे तेल से भरे हुए वे दो पुरुष हैं जो सारी पृथ्वी के परमेश्वर के पास हाजिर रहते हैं।”

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