सपन्याह २:१५
यह वही नगरी है, जो मगन रहती और निडर बैठी रहती थी, और सोचती थी कि मैं ही हूँ, और मुझे छोड़ कोई है ही नहीं। परन्तु अब यह उजाड़ और वन-पशुओं के बैठने का स्थान बन गया है, यहाँ तक कि जो कोई इसके पास होकर चले, वह ताली बजाएगा और हाथ हिलाएगा।सपन्याह २:१५ · IRV
यह पद अन्य भाषाओं में
- English — Zephaniah 2:15
- This is the joyous city that lived carelessly, that said in her heart, “I am, and there is no one besides me.” How she has become a desolation, a place for animals to lie down in! Everyone who passes by her will hiss and shake their fists.
- ગુજરાતી — સફાન્યા ૨:૧૫
- આ આનંદી નગર નિશ્ચિંત રહેતું હતું, તે હૃદયમાં કહે છે કે, “હું છું અને મારા જેવું કોઈ પણ નથી.” તે કેવું વેરાન તથા પશુઓના રહેવાનું સ્થાન થઈ ગયું છે. તેની પાસે થઈને જનાર દરેક માણસ નિસાસા સાથે પોતાનો હાથ હલાવશે.
संदर्भ में
१३वह अपना हाथ उत्तर दिशा की ओर बढ़ाकर अश्शूर को नाश करेगा, और नीनवे को उजाड़ कर जंगल के समान निर्जल कर देगा।
१४उसके बीच में सब जाति के वन पशु झुण्ड के झुण्ड बैठेंगे; उसके खम्भों की कँगनियों पर धनेश और साही दोनों रात को बसेरा करेंगे और उसकी खिड़कियों में बोला करेंगे; उसकी डेवढ़ियाँ सूनी पड़ी रहेंगी, और देवदार की लकड़ी उघाड़ी जाएगी।
१५यह वही नगरी है, जो मगन रहती और निडर बैठी रहती थी, और सोचती थी कि मैं ही हूँ, और मुझे छोड़ कोई है ही नहीं। परन्तु अब यह उजाड़ और वन-पशुओं के बैठने का स्थान बन गया है, यहाँ तक कि जो कोई इसके पास होकर चले, वह ताली बजाएगा और हाथ हिलाएगा।
