2 इतिहास ६:२८
“जब इस देश में अकाल या मरी या झुलस हो या गेरुई या टिड्डियाँ या कीड़े लगें, या उनके शत्रु उनके देश के फाटकों में उन्हें घेर रखें, या कोई विपत्ति या रोग हो;2 इतिहास ६:२८ · IRV
यह पद अन्य भाषाओं में
- English — 2 Chronicles 6:28
- “If there is famine in the land, if there is pestilence, if there is blight or mildew, locust or caterpillar; if their enemies besiege them in the land of their cities; whatever plague or whatever sickness there is—
- ગુજરાતી — 2 કાળવૃતાંત ૬:૨૮
- કદાચ તે દેશમાં દુકાળ પડે અથવા રોગ ફેલાય, વિનાશ કે ફૂગ ફેલાય, તીડ કે ઈયળો પડે; અથવા દુશ્મનો તે દેશના પ્રવેશદ્વારો પર હુમલો કરે અથવા ગમે ત્યાં તે મરકી અથવા બીમારી આવે,
संदर्भ में
२६“जब वे तेरे विरुद्ध पाप करें, और इस कारण आकाश इतना बन्द हो जाए कि वर्षा न हो, ऐसे समय यदि वे इस स्थान की ओर प्रार्थना करके तेरे नाम को मानें, और तू जो उन्हें दुःख देता है, इस कारण वे अपने पाप से फिरें,
२७तो तू स्वर्ग में से सुनना, और अपने दासों और अपनी प्रजा इस्राएल के पाप को क्षमा करना; तू जो उनको वह भला मार्ग दिखाता है जिस पर उन्हें चलना चाहिये, इसलिए अपने इस देश पर जिसे तूने अपनी प्रजा का भाग करके दिया है, पानी बरसा देना।
२८“जब इस देश में अकाल या मरी या झुलस हो या गेरुई या टिड्डियाँ या कीड़े लगें, या उनके शत्रु उनके देश के फाटकों में उन्हें घेर रखें, या कोई विपत्ति या रोग हो;
२९तब यदि कोई मनुष्य या तेरी सारी प्रजा इस्राएल जो अपना-अपना दुःख और अपना-अपना खेद जानकर और गिड़गिड़ाहट के साथ प्रार्थना करके अपने हाथ इस भवन की ओर फैलाएँ;
३०तो तू अपने स्वर्गीय निवास-स्थान से सुनकर क्षमा करना, और एक-एक के मन की जानकर उसकी चाल के अनुसार उसे फल देना; (तू ही तो आदमियों के मन का जाननेवाला है);
