दानिय्येल ५:२१
वह मनुष्यों में से निकाला गया, और उसका मन पशुओं का सा, और उसका निवास जंगली गदहों के बीच हो गया; वह बैलों के समान घास चरता, और उसका शरीर आकाश की ओस से भीगा करता था, जब तक कि उसने जान न लिया कि परमप्रधान परमेश्वर मनुष्यों के राज्य में प्रभुता करता है और जिसे चाहता उसी को उस पर अधिकारी ठहराता है।दानिय्येल ५:२१ · IRV
यह पद अन्य भाषाओं में
- English — Daniel 5:21
- He was driven from the sons of men, and his heart was made like the animals’, and his dwelling was with the wild donkeys. He was fed with grass like oxen, and his body was wet with the dew of the sky, until he knew that the Most High God rules in the kingdom of men, and that he sets up over it whomever he will.
- ગુજરાતી — દાનિયેલ ૫:૨૧
- પરાત્પર ઈશ્વરનો અધિકાર લોકોના રાજ્ય ઉપર છે, જેને ચાહે તેની તે નિમણૂક કરે છે, એવું જ્યારે તેમણે જાણ્યું કે તેમને માણસોમાંથી હાંકી કાઢવામાં આવ્યા, ત્યારે તેમનું મન પશુ સમાન થઈ ગયું. તે બળદની જેમ ઘાસ ખાતા હતા, તેમને જંગલી ગધેડા ભેગા રહેવું પડ્યું અને તેમનું શરીર ખુલ્લા આકાશ નીચે ઝાકળથી પલળતું હતું.
संदर्भ में
१९और उस बड़ाई के कारण जो उसने उसको दी थी, देश-देश और जाति-जाति के सब लोग, और भिन्न-भिन्न भाषा बोलनेवाले उसके सामने काँपते और थरथराते थे, जिसे वह चाहता उसे वह घात करता था, और जिसको वह चाहता उसे वह जीवित रखता था जिसे वह चाहता उसे वह ऊँचा पद देता था, और जिसको वह चाहता उसे वह गिरा देता था।
२०परन्तु जब उसका मन फूल उठा, और उसकी आत्मा कठोर हो गई, यहाँ तक कि वह अभिमान करने लगा, तब वह अपने राजसिंहासन पर से उतारा गया, और उसकी प्रतिष्ठा भंग की गई; (नीति. 16:15)
२१वह मनुष्यों में से निकाला गया, और उसका मन पशुओं का सा, और उसका निवास जंगली गदहों के बीच हो गया; वह बैलों के समान घास चरता, और उसका शरीर आकाश की ओस से भीगा करता था, जब तक कि उसने जान न लिया कि परमप्रधान परमेश्वर मनुष्यों के राज्य में प्रभुता करता है और जिसे चाहता उसी को उस पर अधिकारी ठहराता है।
२२तो भी, हे बेलशस्सर, तू जो उसका पुत्र है, और यह सब कुछ जानता था, तो भी तेरा मन नम्र न हुआ।
२३वरन् तूने स्वर्ग के प्रभु के विरुद्ध सिर उठाकर उसके भवन के पात्र मँगवाकर अपने सामने रखवा लिए, और अपने प्रधानों और रानियों और रखैलों समेत तूने उनमें दाखमधु पिया; और चाँदी-सोने, पीतल, लोहे, काठ और पत्थर के देवता, जो न देखते न सुनते, न कुछ जानते हैं, उनकी तो स्तुति की, परन्तु परमेश्वर, जिसके हाथ में तेरा प्राण है, और जिसके वश में तेरा सब चलना फिरना है, उसका सम्मान तूने नहीं किया। (अय्यू. 12:10, भज. 115:4-8)
