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Methodist Church Nadiad
क्योंकि खाने-पीने और सुख भोगने में उससे अधिक समर्थ कौन है?

सभोपदेशक २:२५ · IRV

यह पद अन्य भाषाओं में

EnglishEcclesiastes 2:25
For who can eat, or who can have enjoyment, more than I?
ગુજરાતીસભાશિક્ષક ૨:૨૫
પરંતુ ઈશ્વરની કૃપા વિના કોણ ખાઈ શકે અથવા સુખ ભોગવી શકે?

संदर्भ में

२३उसके सब दिन तो दुःखों से भरे रहते हैं, और उसका काम खेद के साथ होता है; रात को भी उसका मन चैन नहीं पाता। यह भी व्यर्थ ही है।

२४मनुष्य के लिये खाने-पीने और परिश्रम करते हुए अपने जीव को सुखी रखने के सिवाय और कुछ भी अच्छा नहीं। मैंने देखा कि यह भी परमेश्वर की ओर से मिलता है।

२५क्योंकि खाने-पीने और सुख भोगने में उससे अधिक समर्थ कौन है?

२६जो मनुष्य परमेश्वर की दृष्टि में अच्छा है, उसको वह बुद्धि और ज्ञान और आनन्द देता है; परन्तु पापी को वह दुःख भरा काम ही देता है कि वह उसको देने के लिये संचय करके ढेर लगाए जो परमेश्वर की दृष्टि में अच्छा हो। यह भी व्यर्थ और वायु को पकड़ना है ।

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