सभोपदेशक ५:१०
जो रुपये से प्रीति रखता है वह रुपये से तृप्त न होगा; और न जो बहुत धन से प्रीति रखता है, लाभ से यह भी व्यर्थ है।सभोपदेशक ५:१० · IRV
यह पद अन्य भाषाओं में
- English — Ecclesiastes 5:10
- He who loves silver shall not be satisfied with silver, nor he who loves abundance, with increase. This also is vanity.
- ગુજરાતી — સભાશિક્ષક ૫:૧૦
- રૂપાનો લોભી ચાંદીથી સંતુષ્ટ થશે નહિ. સમૃદ્ધિનો લોભી સમૃદ્ધિથી સંતોષ પામશે નહિ.
संदर्भ में
८यदि तू किसी प्रान्त में निर्धनों पर अंधेर और न्याय और धर्म को बिगड़ता देखे, तो इससे चकित न होना; क्योंकि एक अधिकारी से बड़ा दूसरा रहता है जिसे इन बातों की सुधि रहती है, और उनसे भी और अधिक बड़े रहते हैं।
९भूमि की उपज सब के लिये है, वरन् खेती से राजा का भी काम निकलता है।
१०जो रुपये से प्रीति रखता है वह रुपये से तृप्त न होगा; और न जो बहुत धन से प्रीति रखता है, लाभ से यह भी व्यर्थ है।
११जब सम्पत्ति बढ़ती है, तो उसके खानेवाले भी बढ़ते हैं, तब उसके स्वामी को इसे छोड़ और क्या लाभ होता है कि उस सम्पत्ति को अपनी आँखों से देखे?
१२परिश्रम करनेवाला चाहे थोड़ा खाए, या बहुत, तो भी उसकी नींद सुखदाई होती है; परन्तु धनी के धन बढ़ने के कारण उसको नींद नहीं आती।
