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Methodist Church Nadiad
किसी मनुष्य को परमेश्वर धन-सम्पत्ति और प्रतिष्ठा यहाँ तक देता है कि जो कुछ उसका मन चाहता है उसे उसकी कुछ भी घटी नहीं होती, तो भी परमेश्वर उसको उसमें से खाने नहीं देता, कोई दूसरा ही उसे खाता है; यह व्यर्थ और भयानक दुःख है।

सभोपदेशक ६:२ · IRV

यह पद अन्य भाषाओं में

EnglishEcclesiastes 6:2
a man to whom God gives riches, wealth, and honor, so that he lacks nothing for his soul of all that he desires, yet God gives him no power to eat of it, but an alien eats it. This is vanity, and it is an evil disease.
ગુજરાતીસભાશિક્ષક ૬:૨
એટલે જેને ઈશ્વરે ધન-સંપત્તિ અને સન્માન આપ્યા છે કે જે કંઈ તે ઇચ્છે છે તે સર્વમાં તેના મનને કશી ખોટ પડશે નહિ. પરંતુ તેનો ઉપભોગ કરવાની શક્તિ તેને આપતા નથી. પણ બીજો કોઈ તેનો ઉપભોગ કરે છે. આ પણ વ્યર્થતા તથા ભારે દુ:ખ છે.

संदर्भ में

एक बुराई जो मैंने सूर्य के नीचे देखी है, वह मनुष्यों को बहुत भारी लगती है:

किसी मनुष्य को परमेश्वर धन-सम्पत्ति और प्रतिष्ठा यहाँ तक देता है कि जो कुछ उसका मन चाहता है उसे उसकी कुछ भी घटी नहीं होती, तो भी परमेश्वर उसको उसमें से खाने नहीं देता, कोई दूसरा ही उसे खाता है; यह व्यर्थ और भयानक दुःख है।

यदि किसी पुरुष के सौ पुत्र हों, और वह बहुत वर्ष जीवित रहे और उसकी आयु बढ़ जाए, परन्तु न उसका प्राण प्रसन्न रहे और न उसकी अन्तिम क्रिया की जाए , तो मैं कहता हूँ कि ऐसे मनुष्य से अधूरे समय का जन्मा हुआ बच्चा उत्तम है।

क्योंकि वह व्यर्थ ही आया और अंधेरे में चला गया, और उसका नाम भी अंधेरे में छिप गया;

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