यशायाह ४४:१३
बढ़ई सूत लगाकर टाँकी से रेखा करता है और रन्दनी से काम करता और परकार से रेखा खींचता है, वह उसका आकार और मनुष्य की सी सुन्दरता बनाता है ताकि लोग उसे घर में रखें।यशायाह ४४:१३ · IRV
यह पद अन्य भाषाओं में
- English — Isaiah 44:13
- The carpenter stretches out a line. He marks it out with a pencil. He shapes it with planes. He marks it out with compasses, and shapes it like the figure of a man, with the beauty of a man, to reside in a house.
- ગુજરાતી — યશાયા ૪૪:૧૩
- સુથાર રંગેલી દોરીથી તેને માપે છે અને ચોકથી રેખા દોરે છે. તે તેના પર રંધો મારે છે અને વર્તુળથી તેની રેખા દોરે છે. મંદિરમાં મૂકવા માટે પુરુષના આકાર પ્રમાણે, માણસના સૌંદર્ય પ્રમાણે તે તેને બનાવે છે.
संदर्भ में
११देख, उसके सब संगियों को तो लज्जित होना पड़ेगा, कारीगर तो मनुष्य ही है; वे सब के सब इकट्ठे होकर खड़े हों; वे डर जाएँगे; वे सब के सब लज्जित होंगे।
१२लोहार एक बसूला अंगारों में बनाता और हथौड़ों से गढ़कर तैयार करता है, अपने भुजबल से वह उसको बनाता है; फिर वह भूखा हो जाता है और उसका बल घटता है, वह पानी नहीं पीता और थक जाता है।
१३बढ़ई सूत लगाकर टाँकी से रेखा करता है और रन्दनी से काम करता और परकार से रेखा खींचता है, वह उसका आकार और मनुष्य की सी सुन्दरता बनाता है ताकि लोग उसे घर में रखें।
१४वह देवदार को काटता या वन के वृक्षों में से जाति-जाति के बांज वृक्ष चुनकर देख-भाल करता है, वह देवदार का एक वृक्ष लगाता है जो वर्षा का जल पाकर बढ़ता है।
१५तब वह मनुष्य के ईंधन के काम में आता है ; वह उसमें से कुछ सुलगाकर तापता है, वह उसको जलाकर रोटी बनाता है; उसी से वह देवता भी बनाकर उसको दण्डवत् करता है; वह मूरत खुदवाकर उसके सामने प्रणाम करता है।
