यशायाह ५५:१०
“जिस प्रकार से वर्षा और हिम आकाश से गिरते हैं और वहाँ ऐसे ही लौट नहीं जाते, वरन् भूमि पर पड़कर उपज उपजाते हैं जिस से बोनेवाले को बीज और खानेवाले को रोटी मिलती है, (2 कुरि. 9:10)यशायाह ५५:१० · IRV
यह पद अन्य भाषाओं में
- English — Isaiah 55:10
- For as the rain comes down and the snow from the sky, and doesn’t return there, but waters the earth, and makes it grow and bud, and gives seed to the sower and bread to the eater;
- ગુજરાતી — યશાયા ૫૫:૧૦
- કેમ કે જેમ વરસાદ અને હિમ આકાશથી પડે છે અને ભૂમિને સિંચ્યા વિના, તેને ફળદ્રુપ કર્યા વિના તથા વાવનારને અનાજ તથા ખાનાર ને અન્ન આપ્યા વિના વચનો પાછાં ફરતાં નથી.
संदर्भ में
८क्योंकि यहोवा कहता है, मेरे विचार और तुम्हारे विचार एक समान नहीं है, न तुम्हारी गति और मेरी गति एक सी है। (रोम. 11:33)
९क्योंकि मेरी और तुम्हारी गति में और मेरे और तुम्हारे सोच विचारों में, आकाश और पृथ्वी का अन्तर है।
१०“जिस प्रकार से वर्षा और हिम आकाश से गिरते हैं और वहाँ ऐसे ही लौट नहीं जाते, वरन् भूमि पर पड़कर उपज उपजाते हैं जिस से बोनेवाले को बीज और खानेवाले को रोटी मिलती है, (2 कुरि. 9:10)
११उसी प्रकार से मेरा वचन भी होगा जो मेरे मुख से निकलता है; वह व्यर्थ ठहरकर मेरे पास न लौटेगा, परन्तु, जो मेरी इच्छा है उसे वह पूरा करेगा , और जिस काम के लिये मैंने उसको भेजा है उसे वह सफल करेगा।
१२“क्योंकि तुम आनन्द के साथ निकलोगे, और शान्ति के साथ पहुँचाए जाओगे; तुम्हारे आगे-आगे पहाड़ और पहाड़ियाँ गला खोलकर जयजयकार करेंगी, और मैदान के सब वृक्ष आनन्द के मारे ताली बजाएँगे।
