यशायाह ५७:१५
क्योंकि जो महान और उत्तम और सदैव स्थिर रहता, और जिसका नाम पवित्र है, वह यह कहता है, “मैं ऊँचे पर और पवित्रस्थान में निवास करता हूँ, और उसके संग भी रहता हूँ, जो खेदित और नम्र हैं, कि, नम्र लोगों के हृदय और खेदित लोगों के मन को हर्षित करूँ।यशायाह ५७:१५ · IRV
यह पद अन्य भाषाओं में
- English — Isaiah 57:15
- For the high and lofty One who inhabits eternity, whose name is Holy, says: “I dwell in the high and holy place, with him also who is of a contrite and humble spirit, to revive the spirit of the humble, and to revive the heart of the contrite.
- ગુજરાતી — યશાયા ૫૭:૧૫
- કેમ કે જે ઉચ્ચ તથા ઉન્નત છે, જે સનાતન કાળથી છે, જેમનું નામ પવિત્ર છે, તે એવું કહે છે: હું ઉચ્ચ તથા પવિત્રસ્થાનમાં રહું છું, વળી જે કચડાયેલ અને આત્મામાં નમ્ર છે તેની સાથે રહું છું, જેથી હું નમ્ર જનોનો આત્મા અને પશ્ચાતાપ કરનારાઓનાં હૃદયને ઉત્તેજિત કરું.
संदर्भ में
१३जब तू दुहाई दे, तब जिन मूर्तियों को तूने जमा किया है वे ही तुझे छुड़ाएँ! वे तो सब की सब वायु से वरन् एक ही फूँक से उड़ जाएँगी। परन्तु जो मेरी शरण लेगा वह देश का अधिकारी होगा, और मेरे पवित्र पर्वत का भी अधिकारी होगा।
१४यह कहा जाएगा, “पाँति बाँध बाँधकर राजमार्ग बनाओ, मेरी प्रजा के मार्ग में से हर एक ठोकर दूर करो।”
१५क्योंकि जो महान और उत्तम और सदैव स्थिर रहता, और जिसका नाम पवित्र है, वह यह कहता है, “मैं ऊँचे पर और पवित्रस्थान में निवास करता हूँ, और उसके संग भी रहता हूँ, जो खेदित और नम्र हैं, कि, नम्र लोगों के हृदय और खेदित लोगों के मन को हर्षित करूँ।
१६मैं सदा मुकद्दमा न लड़ता रहूँगा, न सर्वदा क्रोधित रहूँगा; क्योंकि आत्मा मेरे बनाए हुए हैं और जीव मेरे सामने मूर्छित हो जाते हैं।
१७उसके लोभ के पाप के कारण मैंने क्रोधित होकर उसको दुःख दिया था, और क्रोध के मारे उससे मुँह छिपाया था; परन्तु वह अपने मनमाने मार्ग में दूर भटकता चला गया था।
