यशायाह ५७:१७
उसके लोभ के पाप के कारण मैंने क्रोधित होकर उसको दुःख दिया था, और क्रोध के मारे उससे मुँह छिपाया था; परन्तु वह अपने मनमाने मार्ग में दूर भटकता चला गया था।यशायाह ५७:१७ · IRV
यह पद अन्य भाषाओं में
- English — Isaiah 57:17
- I was angry because of the iniquity of his covetousness and struck him. I hid myself and was angry; and he went on backsliding in the way of his heart.
- ગુજરાતી — યશાયા ૫૭:૧૭
- તેણે લોભથી પ્રાપ્ત કરવાને કરેલાં પાપને કારણે હું તેના પર રોષે ભરાયો હતો અને મેં તેને શિક્ષા કરી; મેં તેનાથી મારું મુખ ફેરવ્યું અને હું રોષમાં હતો, પણ તેં પાછો વળીને પોતાના હૃદયને માર્ગે ચાલ્યો ગયો.
संदर्भ में
१५क्योंकि जो महान और उत्तम और सदैव स्थिर रहता, और जिसका नाम पवित्र है, वह यह कहता है, “मैं ऊँचे पर और पवित्रस्थान में निवास करता हूँ, और उसके संग भी रहता हूँ, जो खेदित और नम्र हैं, कि, नम्र लोगों के हृदय और खेदित लोगों के मन को हर्षित करूँ।
१६मैं सदा मुकद्दमा न लड़ता रहूँगा, न सर्वदा क्रोधित रहूँगा; क्योंकि आत्मा मेरे बनाए हुए हैं और जीव मेरे सामने मूर्छित हो जाते हैं।
१७उसके लोभ के पाप के कारण मैंने क्रोधित होकर उसको दुःख दिया था, और क्रोध के मारे उससे मुँह छिपाया था; परन्तु वह अपने मनमाने मार्ग में दूर भटकता चला गया था।
१८मैं उसकी चाल देखता आया हूँ, तो भी अब उसको चंगा करूँगा; मैं उसे ले चलूँगा और विशेष करके उसके शोक करनेवालों को शान्ति दूँगा।
१९मैं मुँह के फल का सृजनहार हूँ; यहोवा ने कहा है, जो दूर और जो निकट हैं, दोनों को पूरी शान्ति मिले; और मैं उसको चंगा करूँगा। (इफि. 2:13,17, रोम. 2:39, इब्रा. 13:15)
