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Methodist Church Nadiad
(परदेशी को सड़क पर टिकना न पड़ता था; मैं बटोही के लिये अपना द्वार खुला रखता था);

अय्यूब ३१:३२ · IRV

यह पद अन्य भाषाओं में

EnglishJob 31:32
(the foreigner has not camped in the street, but I have opened my doors to the traveler);
ગુજરાતીઅયૂબ ૩૧:૩૨
પરદેશીને શહેરના ચોકમાં રહેવું પડતું નહતું; તેને બદલે, હું મુસાફરને માટે મારા ઘરના દરવાજા હંમેશા ખુલ્લા રાખતો હતો.

संदर्भ में

३०(परन्तु मैंने न तो उसको श्राप देते हुए, और न उसके प्राणदण्ड की प्रार्थना करते हुए अपने मुँह से पाप किया है);

३१यदि मेरे डेरे के रहनेवालों ने यह न कहा होता, ‘ऐसा कोई कहाँ मिलेगा, जो इसके यहाँ का माँस खाकर तृप्त न हुआ हो?’

३२(परदेशी को सड़क पर टिकना न पड़ता था; मैं बटोही के लिये अपना द्वार खुला रखता था);

३३यदि मैंने आदम के समान अपना अपराध छिपाकर अपने अधर्म को ढाँप लिया हो,

३४इस कारण कि मैं बड़ी भीड़ से भय खाता था, या कुलीनों से तुच्छ किए जाने से डर गया यहाँ तक कि मैं द्वार से बाहर न निकला-

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