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Methodist Church Nadiad
जब उसने वे ग्यारह सौ टुकड़े चाँदी अपनी माता को वापस दिए; तब माता ने कहा, “मैं अपनी ओर से अपने बेटे के लिये यह रुपया यहोवा को निश्चय अर्पण करती हूँ ताकि उससे एक मूरत खोदकर, और दूसरी ढालकर बनाई जाए, इसलिए अब मैं उसे तुझको वापस देती हूँ।”

न्यायियों १७:३ · IRV

यह पद अन्य भाषाओं में

EnglishJudges 17:3
He restored the eleven hundred pieces of silver to his mother, then his mother said, “I most certainly dedicate the silver to the LORD from my hand for my son, to make a carved image and a molten image. Now therefore I will restore it to you.”
ગુજરાતીન્યાયાધીશો ૧૭:૩
તેણે તે અગિયારસો ચાંદીના સિક્કા પોતાની માતાને પાછા આપ્યાં. ત્યારે માતાએ કહ્યું, “મારા દીકરાને માટે કોરેલી મૂર્તિ તથા ધાતુની મૂર્તિ બનાવવાને માટે, મેં તે સિક્કા ઈશ્વરને અર્પણ કરવા અલગ રાખ્યા હતા. તેથી હવે, હું તને તે પાછા આપીશ.”

संदर्भ में

एप्रैम के पहाड़ी देश में मीका नामक एक पुरुष था।

उसने अपनी माता से कहा, “जो ग्यारह सौ टुकड़े चाँदी तुझ से ले लिए गए थे, जिनके विषय में तूने मेरे सुनते भी श्राप दिया था, वे मेरे पास हैं; मैंने ही उनको ले लिया था।” उसकी माता ने कहा, “मेरे बेटे पर यहोवा की ओर से आशीष हो।”

जब उसने वे ग्यारह सौ टुकड़े चाँदी अपनी माता को वापस दिए; तब माता ने कहा, “मैं अपनी ओर से अपने बेटे के लिये यह रुपया यहोवा को निश्चय अर्पण करती हूँ ताकि उससे एक मूरत खोदकर, और दूसरी ढालकर बनाई जाए, इसलिए अब मैं उसे तुझको वापस देती हूँ।”

जब उसने वह रुपया अपनी माता को वापस दिया, तब माता ने दो सौ टुकड़े ढलवैयों को दिए, और उसने उनसे एक मूर्ति खोदकर, और दूसरी ढालकर बनाई; और वे मीका के घर में रहीं।

मीका के पास एक देवस्थान था, तब उसने एक एपोद, और कई एक गृहदेवता बनवाए; और अपने एक बेटे का संस्कार करके उसे अपना पुरोहित ठहरा लिया

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