भजन संहिता ३२:२
क्या ही धन्य है वह मनुष्य जिसके अधर्म का यहोवा लेखा न ले, और जिसकी आत्मा में कपट न हो। (रोम. 4:8)भजन संहिता ३२:२ · IRV
यह पद अन्य भाषाओं में
- English — Psalms 32:2
- Blessed is the man to whom the LORD doesn’t impute iniquity, in whose spirit there is no deceit.
- ગુજરાતી — ગીતશાસ્ત્ર ૩૨:૨
- જેને યહોવાહ દોષિત ગણતા નથી અને જેના આત્મામાં કંઈ કપટ નથી, તે આશીર્વાદિત છે.
संदर्भ में
१क्या ही धन्य है वह जिसका अपराध क्षमा किया गया, और जिसका पाप ढाँपा गया हो । (रोम. 4:7)
२क्या ही धन्य है वह मनुष्य जिसके अधर्म का यहोवा लेखा न ले, और जिसकी आत्मा में कपट न हो। (रोम. 4:8)
३जब मैं चुप रहा तब दिन भर कराहते-कराहते मेरी हड्डियाँ पिघल गई।
४क्योंकि रात-दिन मैं तेरे हाथ के नीचे दबा रहा; और मेरी तरावट धूपकाल की सी झुर्राहट बनती गई। (सेला)
