भजन संहिता ३२:४
क्योंकि रात-दिन मैं तेरे हाथ के नीचे दबा रहा; और मेरी तरावट धूपकाल की सी झुर्राहट बनती गई। (सेला)भजन संहिता ३२:४ · IRV
यह पद अन्य भाषाओं में
- English — Psalms 32:4
- For day and night your hand was heavy on me. My strength was sapped in the heat of summer. Selah.
- ગુજરાતી — ગીતશાસ્ત્ર ૩૨:૪
- કેમ કે રાતદિવસ તમારો હાથ મારા પર ભારે હતો. જેમ ઉનાળાંની ગરમીમાં જળ સુકાઈ જાય છે, તેમ મારી શક્તિ હણાઈ ગઈ હતી. સેલાહ
संदर्भ में
२क्या ही धन्य है वह मनुष्य जिसके अधर्म का यहोवा लेखा न ले, और जिसकी आत्मा में कपट न हो। (रोम. 4:8)
३जब मैं चुप रहा तब दिन भर कराहते-कराहते मेरी हड्डियाँ पिघल गई।
४क्योंकि रात-दिन मैं तेरे हाथ के नीचे दबा रहा; और मेरी तरावट धूपकाल की सी झुर्राहट बनती गई। (सेला)
५जब मैंने अपना पाप तुझ पर प्रगट किया और अपना अधर्म न छिपाया, और कहा, “मैं यहोवा के सामने अपने अपराधों को मान लूँगा;” तब तूने मेरे अधर्म और पाप को क्षमा कर दिया। (सेला) (1 यूह. 1:9)
६इस कारण हर एक भक्त तुझ से ऐसे समय में प्रार्थना करे जबकि तू मिल सकता है । निश्चय जब जल की बड़ी बाढ़ आए तो भी उस भक्त के पास न पहुँचेगी।
