भजन संहिता ४२:४
मैं कैसे भीड़ के संग जाया करता था, मैं जयजयकार और धन्यवाद के साथ उत्सव करनेवाली भीड़ के बीच में परमेश्वर के भवन को धीरे धीरे जाया करता था; यह स्मरण करके मेरा प्राण शोकित हो जाता है।भजन संहिता ४२:४ · IRV
यह पद अन्य भाषाओं में
- English — Psalms 42:4
- These things I remember, and pour out my soul within me, how I used to go with the crowd, and led them to God’s house, with the voice of joy and praise, a multitude keeping a holy day.
- ગુજરાતી — ગીતશાસ્ત્ર ૪૨:૪
- હું લોકોના ટોળાં સાથે અને પર્વ પાળનારા લોકોના સમુદાયને આનંદોત્સવમાં, સ્તુતિના નાદ સાથે, ઈશ્વરના ઘરમાં દોરી જતો હતો, એ વાતો યાદ કરું છું, ત્યારે મારો આત્મા છેક પીગળી જાય છે.
संदर्भ में
२जीविते परमेश्वर, हाँ परमेश्वर, का मैं प्यासा हूँ, मैं कब जाकर परमेश्वर को अपना मुँह दिखाऊँगा? (भज. 63:1, प्रका. 22:4)
३मेरे आँसू दिन और रात मेरा आहार हुए हैं; और लोग दिन भर मुझसे कहते रहते हैं, तेरा परमेश्वर कहाँ है?
४मैं कैसे भीड़ के संग जाया करता था, मैं जयजयकार और धन्यवाद के साथ उत्सव करनेवाली भीड़ के बीच में परमेश्वर के भवन को धीरे धीरे जाया करता था; यह स्मरण करके मेरा प्राण शोकित हो जाता है।
५हे मेरे प्राण, तू क्यों गिरा जाता है? और तू अन्दर ही अन्दर क्यों व्याकुल है? परमेश्वर पर आशा लगाए रह; क्योंकि मैं उसके दर्शन से उद्धार पाकर फिर उसका धन्यवाद करूँगा। (मत्ती 26:38, मर. 14:34, यूह. 12:27)
६हे मेरे परमेश्वर; मेरा प्राण मेरे भीतर गिरा जाता है, इसलिए मैं यरदन के पास के देश से और हेर्मोन के पहाड़ों और मिसगार की पहाड़ी के ऊपर से तुझे स्मरण करता हूँ।
