भजन संहिता ४२:५
हे मेरे प्राण, तू क्यों गिरा जाता है? और तू अन्दर ही अन्दर क्यों व्याकुल है? परमेश्वर पर आशा लगाए रह; क्योंकि मैं उसके दर्शन से उद्धार पाकर फिर उसका धन्यवाद करूँगा। (मत्ती 26:38, मर. 14:34, यूह. 12:27)भजन संहिता ४२:५ · IRV
यह पद अन्य भाषाओं में
- English — Psalms 42:5
- Why are you in despair, my soul? Why are you disturbed within me? Hope in God! For I shall still praise him for the saving help of his presence.
- ગુજરાતી — ગીતશાસ્ત્ર ૪૨:૫
- હે મારા આત્મા, તું કેમ ઉદાસ થયો છે? તું મારામાં કેમ ગભરાયો છે? ઈશ્વરની આશા રાખ, કેમ કે તેમની કૃપાદ્રષ્ટિની સહાયને માટે હું હજી સુધી તેમની સ્તુતિ કરીશ.
संदर्भ में
३मेरे आँसू दिन और रात मेरा आहार हुए हैं; और लोग दिन भर मुझसे कहते रहते हैं, तेरा परमेश्वर कहाँ है?
४मैं कैसे भीड़ के संग जाया करता था, मैं जयजयकार और धन्यवाद के साथ उत्सव करनेवाली भीड़ के बीच में परमेश्वर के भवन को धीरे धीरे जाया करता था; यह स्मरण करके मेरा प्राण शोकित हो जाता है।
५हे मेरे प्राण, तू क्यों गिरा जाता है? और तू अन्दर ही अन्दर क्यों व्याकुल है? परमेश्वर पर आशा लगाए रह; क्योंकि मैं उसके दर्शन से उद्धार पाकर फिर उसका धन्यवाद करूँगा। (मत्ती 26:38, मर. 14:34, यूह. 12:27)
६हे मेरे परमेश्वर; मेरा प्राण मेरे भीतर गिरा जाता है, इसलिए मैं यरदन के पास के देश से और हेर्मोन के पहाड़ों और मिसगार की पहाड़ी के ऊपर से तुझे स्मरण करता हूँ।
७तेरी जलधाराओं का शब्द सुनकर जल , जल को पुकारता है ; तेरी सारी तरंगों और लहरों में मैं डूब गया हूँ।
