भजन संहिता ५८:५
और सपेरा कितनी ही निपुणता से क्यों न मंत्र पढ़े, तो भी उसकी नहीं सुनता।भजन संहिता ५८:५ · IRV
यह पद अन्य भाषाओं में
- English — Psalms 58:5
- which doesn’t listen to the voice of charmers, no matter how skillful the charmer may be.
- ગુજરાતી — ગીતશાસ્ત્ર ૫૮:૫
- કે જે ઘણી જ ચાલાકીથી મોરલી વગાડનાર મદારીનો પણ અવાજ સાંભળતો નથી.
संदर्भ में
३दुष्ट लोग जन्मते ही पराए हो जाते हैं, वे पेट से निकलते ही झूठ बोलते हुए भटक जाते हैं।
४उनमें सर्प का सा विष है; वे उस नाग के समान है, जो सुनना नहीं चाहता ;
५और सपेरा कितनी ही निपुणता से क्यों न मंत्र पढ़े, तो भी उसकी नहीं सुनता।
६हे परमेश्वर, उनके मुँह में से दाँतों को तोड़ दे; हे यहोवा, उन जवान सिंहों की दाढ़ों को उखाड़ डाल!
७वे घुलकर बहते हुए पानी के समान हो जाएँ; जब वे अपने तीर चढ़ाएँ, तब तीर मानो दो टुकड़े हो जाएँ।
