भजन संहिता ५८:४
उनमें सर्प का सा विष है; वे उस नाग के समान है, जो सुनना नहीं चाहता ;भजन संहिता ५८:४ · IRV
यह पद अन्य भाषाओं में
- English — Psalms 58:4
- Their poison is like the poison of a snake, like a deaf cobra that stops its ear,
- ગુજરાતી — ગીતશાસ્ત્ર ૫૮:૪
- તેઓનું વિષ સાપના વિષ જેવું છે; તેઓ કાન બંધ કરી રાખનાર બહેરા સાપ જેવા છે.
संदर्भ में
२नहीं, तुम मन ही मन में कुटिल काम करते हो; तुम देश भर में उपद्रव करते जाते हो।
३दुष्ट लोग जन्मते ही पराए हो जाते हैं, वे पेट से निकलते ही झूठ बोलते हुए भटक जाते हैं।
४उनमें सर्प का सा विष है; वे उस नाग के समान है, जो सुनना नहीं चाहता ;
५और सपेरा कितनी ही निपुणता से क्यों न मंत्र पढ़े, तो भी उसकी नहीं सुनता।
६हे परमेश्वर, उनके मुँह में से दाँतों को तोड़ दे; हे यहोवा, उन जवान सिंहों की दाढ़ों को उखाड़ डाल!
