भजन संहिता ९०:६
वह भोर को फूलती और बढ़ती है, और साँझ तक कटकर मुर्झा जाती है।भजन संहिता ९०:६ · IRV
यह पद अन्य भाषाओं में
- English — Psalms 90:6
- In the morning it sprouts and springs up. By evening, it is withered and dry.
- ગુજરાતી — ગીતશાસ્ત્ર ૯૦:૬
- તે સવારે ખીલે છે અને વધે છે; સાંજે સુકાઈ જાય છે અને ચીમળાય છે.
संदर्भ में
४क्योंकि हजार वर्ष तेरी दृष्टि में ऐसे हैं, जैसा कल का दिन जो बीत गया, या रात का एक पहर। (2 पत. 3:8)
५तू मनुष्यों को धारा में बहा देता है; वे स्वप्न से ठहरते हैं, वे भोर को बढ़नेवाली घास के समान होते हैं।
६वह भोर को फूलती और बढ़ती है, और साँझ तक कटकर मुर्झा जाती है।
७क्योंकि हम तेरे क्रोध से भस्म हुए हैं; और तेरी जलजलाहट से घबरा गए हैं।
८तूने हमारे अधर्म के कामों को अपने सम्मुख , और हमारे छिपे हुए पापों को अपने मुख की ज्योति में रखा है ।
