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Methodist Church Nadiad
वह भोर को फूलती और बढ़ती है, और साँझ तक कटकर मुर्झा जाती है।

भजन संहिता ९०:६ · IRV

यह पद अन्य भाषाओं में

EnglishPsalms 90:6
In the morning it sprouts and springs up. By evening, it is withered and dry.
ગુજરાતીગીતશાસ્ત્ર ૯૦:૬
તે સવારે ખીલે છે અને વધે છે; સાંજે સુકાઈ જાય છે અને ચીમળાય છે.

संदर्भ में

क्योंकि हजार वर्ष तेरी दृष्टि में ऐसे हैं, जैसा कल का दिन जो बीत गया, या रात का एक पहर। (2 पत. 3:8)

तू मनुष्यों को धारा में बहा देता है; वे स्वप्न से ठहरते हैं, वे भोर को बढ़नेवाली घास के समान होते हैं।

वह भोर को फूलती और बढ़ती है, और साँझ तक कटकर मुर्झा जाती है।

क्योंकि हम तेरे क्रोध से भस्म हुए हैं; और तेरी जलजलाहट से घबरा गए हैं।

तूने हमारे अधर्म के कामों को अपने सम्मुख , और हमारे छिपे हुए पापों को अपने मुख की ज्योति में रखा है ।

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