सभोपदेशक ४:८
कोई अकेला रहता और उसका कोई नहीं है; न उसके बेटा है, न भाई है, तो भी उसके परिश्रम का अन्त नहीं होता; न उसकी आँखें धन से सन्तुष्ट होती हैं, और न वह कहता है, मैं किसके लिये परिश्रम करता और अपने जीवन को सुखरहित रखता हूँ? यह भी व्यर्थ और निरा दुःख भरा काम है।सभोपदेशक ४:८ · IRV
यह पद अन्य भाषाओं में
- English — Ecclesiastes 4:8
- There is one who is alone, and he has neither son nor brother. There is no end to all of his labor, neither are his eyes satisfied with wealth. “For whom then do I labor and deprive my soul of enjoyment?” This also is vanity. Yes, it is a miserable business.
- ગુજરાતી — સભાશિક્ષક ૪:૮
- જો માણસ એકલો હોય અને તેને બીજું કોઈ સગુંવહાલું ન હોય, તેને દીકરો પણ ન હોય કે ભાઈ પણ ન હોય છતાંય તેના પરિશ્રમનો પાર હોતો નથી. અને દ્રવ્યથી તેને સંતોષ નથી તે વિચારતો નથી કે “હું આ પરિશ્રમ કોના માટે કરું છું” અને મારા જીવને દુઃખી કરું છું? આ પણ વ્યર્થતા છે હા, મોટું દુઃખ છે.
संदर्भ में
६चैन के साथ एक मुट्ठी उन दो मुट्ठियों से अच्छा है, जिनके साथ परिश्रम और वायु को पकड़ना हो।
७फिर मैंने सूर्य के नीचे यह भी व्यर्थ बात देखी।
८कोई अकेला रहता और उसका कोई नहीं है; न उसके बेटा है, न भाई है, तो भी उसके परिश्रम का अन्त नहीं होता; न उसकी आँखें धन से सन्तुष्ट होती हैं, और न वह कहता है, मैं किसके लिये परिश्रम करता और अपने जीवन को सुखरहित रखता हूँ? यह भी व्यर्थ और निरा दुःख भरा काम है।
९एक से दो अच्छे हैं , क्योंकि उनके परिश्रम का अच्छा फल मिलता है।
१०क्योंकि यदि उनमें से एक गिरे, तो दूसरा उसको उठाएगा; परन्तु हाय उस पर जो अकेला होकर गिरे और उसका कोई उठानेवाला न हो।
